वैश्विक मंच पर भारत का बढ़ता कद: पांच देशों की रणनीतिक यात्रा पर रवाना हुए पीएम मोदी,आज यूएई के राष्ट्रपति से करेंगे मुलाकात
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को पांच देशों की अपनी महत्वपूर्ण विदेश यात्रा के पहले चरण में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के लिए रवाना हो गए। अगले छह दिनों तक चलने वाला यह दौरा भारत की 'ग्लोबल साउथ' और 'यूरोपीय साझेदारी' की रणनीति के लिए गेम-चेंजर माना जा रहा है। इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री यूएई के अलावा नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा करेंगे। मिशन का मुख्य उद्देश्य व्यापार, हरित ऊर्जा, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्रों में भारत की वैश्विक पकड़ को और मजबूत करना है।
प्रधानमंत्री की यात्रा का पहला पड़ाव अबू धाबी है। यहाँ वे यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस मुलाकात में ऊर्जा सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उम्मीद है कि एलपीजी आपूर्ति और भारत में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण को लेकर दो ऐतिहासिक समझौतों पर हस्ताक्षर होंगे। यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। साथ ही, वहाँ रह रहे 45 लाख भारतीय प्रवासियों के हितों और उनकी सुरक्षा पर भी विस्तार से चर्चा होगी। यह प्रधानमंत्री की यूएई के साथ बढ़ती व्यक्तिगत और कूटनीतिक नजदीकियों का ही प्रमाण है कि हाल के वर्षों में दोनों देशों के संबंध निवेश और सुरक्षा के मोर्चे पर नई ऊंचाइयों पर पहुंचे हैं। दौरे के दूसरे चरण में पीएम मोदी नीदरलैंड पहुंचेंगे। 2017 के बाद प्रधानमंत्री की यह दूसरी नीदरलैंड यात्रा है। यहाँ वे किंग विलेम-अलेक्जेंडर और क्वीन मैक्सिमा से मुलाकात करेंगे। प्रधानमंत्री रॉब जेटन के साथ उनकी बातचीत का मुख्य केंद्र हरित हाइड्रोजन और जल प्रबंधन तकनीक होगी, जिसमें नीदरलैंड विश्व स्तर पर अग्रणी है। यात्रा के तीसरे चरण में प्रधानमंत्री स्वीडन के गोथेनबर्ग जाएंगे। स्वीडिश प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन के साथ वार्ता के अलावा, पीएम मोदी 'यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री' को संबोधित करेंगे। इस मंच पर यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की मौजूदगी भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत है। स्वीडन के साथ रक्षा और नवाचार सहयोग पर विशेष चर्चा की उम्मीद है। सोमवार को प्रधानमंत्री नॉर्वे पहुंचेंगे, जहाँ वे 'तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन' में शिरकत करेंगे। यह सम्मेलन भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नॉर्डिक देश (डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे और स्वीडन) सतत विकास, नीली अर्थव्यवस्था और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत के बड़े सहयोगी बन सकते हैं। यहाँ वे कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ अलग से द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। दौरे का अंतिम पड़ाव इटली होगा। प्रधानमंत्री मोदी इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ विस्तृत वार्ता करेंगे। हाल के दिनों में भारत और इटली के बीच रक्षा और विनिर्माण के क्षेत्र में काफी सक्रियता देखी गई है। पीएम मोदी इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मैटरेला से भी शिष्टाचार भेंट करेंगे। विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने मीडिया को बताया कि यह यात्रा प्रधानमंत्री के उस विजन का हिस्सा है जिसमें भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का एक विश्वसनीय केंद्र बनाना है। छह दिनों के भीतर पांच शक्तिशाली अर्थव्यवस्थाओं के साथ यह संवाद भारत की आर्थिक महत्वाकांक्षाओं को नई गति देगा। 23 लाख से ज्यादा छात्र और करोड़ों युवा इस यात्रा को रोजगार और तकनीक हस्तांतरण के सुनहरे अवसर के रूप में देख रहे हैं। यह दौरा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करेगा, बल्कि यह भी स्पष्ट करेगा कि आने वाले दशक में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर तकनीकी रूप से कितना सक्षम है।