भविष्य के युद्धों के लिए भारत तैयार: रक्षा मंत्री ने जारी किए नए सैन्य सिद्धांत, 'ऑपरेशन सिंदूर' की शौर्यगाथा ने पाकिस्तान को घेरा
जयपुर। गुलाबी नगरी में आयोजित दो दिवसीय 'संयुक्त कमांडर सम्मेलन' के पहले दिन भारतीय सैन्य शक्ति और कूटनीति का नया चेहरा सामने आया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तीनों सेनाओं के शीर्ष कमांडरों की मौजूदगी में जहां 'ऑपरेशन सिंदूर' पर एक प्रभावशाली डॉक्यूमेंट्री फिल्म का विमोचन किया, वहीं भविष्य की युद्ध चुनौतियों से निपटने के लिए तीन क्रांतिकारी सैन्य सिद्धांतों को भी जारी किया।
सम्मेलन का मुख्य आकर्षण 28 मिनट की वह डॉक्यूमेंट्री रही, जो 'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली वर्षगांठ पर जारी की गई। यह फिल्म मात्र एक वीडियो नहीं, बल्कि पाकिस्तान की उस 'स्टेट पॉलिसी' पर कड़ा प्रहार है, जिसके तहत वह आतंकवाद को हथियार के रूप में इस्तेमाल करता है। फिल्म में 26/11 के मुंबई हमलों से लेकर पहलगाम तक की आतंकी घटनाओं का सिलसिलेवार ब्यौरा दिया गया है। फिल्म का सबसे सशक्त हिस्सा वह है, जिसमें भारतीय सेनाओं की उस निर्णायक और त्वरित कार्रवाई को दिखाया गया है, जिसने चंद घंटों के भीतर पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। यह फिल्म दुनिया को संदेश देती है कि भारत अब केवल रक्षात्मक नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर आक्रामक जवाब देने में भी सक्षम है। आधुनिक युद्ध अब केवल जमीन, जल या नभ तक सीमित नहीं रह गया है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने तीन महत्वपूर्ण दस्तावेज जारी किए, जो भारतीय सेना के 'डिजिटल योद्धा' बनने की राह प्रशस्त करेंगे। यह भारत का वह विजन है जहाँ युद्ध के मैदान में सैनिक और एआई-आधारित रोबोटिक सिस्टम एक साथ तालमेल बिठाकर काम करेंगे। इसका उद्देश्य मानवीय जोखिम को कम करना और मशीनी सटीकता से दुश्मन को नेस्तनाबूद करना है। भविष्य के युद्ध 'डेटा' और 'नेटवर्क' से लड़े जाएंगे। यह नीति सेना के सूचना तंत्र को अभेद्य सुरक्षा कवच प्रदान करेगी और साइबर युद्ध में भारत का दबदबा सुनिश्चित करेगी। यह तीनों सेनाओं के बीच प्रशासनिक और परिचालन स्तर पर संवाद की बाधाओं को दूर कर उन्हें एक 'सिंगल यूनिट' के रूप में काम करने में मदद करेगा।
सम्मेलन के दौरान सेना के थिएटरीकरण पर भी गहन मंथन हुआ। सीडीएस जनरल अनिल चौहान पहले ही अपनी रिपोर्ट सौंप चुके हैं और अब बस कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की समिति की हरी झंडी का इंतजार है। सम्मेलन का स्पष्ट संदेश है कि तीनों सेनाओं को अलग-अलग काम करने के बजाय एक एकीकृत कमान के तहत आना होगा, ताकि युद्ध की स्थिति में तत्काल और एकीकृत प्रहार किया जा सके। रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत अब केवल हथियारों का खरीदार नहीं, बल्कि निर्माता बनेगा। सम्मेलन में एआई,अंतरिक्ष और मानवरहित प्रणालियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्वदेशी रूप से विकसित भविष्य की तकनीकी प्रणालियों का प्रदर्शन यह दर्शाता है कि 'आत्मनिर्भर भारत' अब सैन्य मोर्चे पर भी हकीकत बन चुका है। यह सम्मेलन भारतीय सेना के कायाकल्प का गवाह बन रहा है। एक तरफ जहां हम अपनी गौरवशाली विजयों (ऑपरेशन सिंदूर) को याद कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ साइबर और एआई जैसे अदृश्य मोर्चों पर अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं। रक्षा मंत्री के नेतृत्व में जयपुर से निकला यह संदेश साफ है भारत शांति का पक्षधर है, लेकिन उसकी संप्रभुता से खिलवाड़ करने वालों के लिए अब नई 'युद्ध नीति' तैयार है।