वन विकास निगम के आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवा समाप्ति पर हाईकोर्ट सख्त, दो सप्ताह में कार्रवाई के निर्देश
नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय में वन विकास निगम से निकाले गए आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवा समाप्ति के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को अपना प्रतिवेदन वन विकास निगम में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अदालत ने निगम के प्रबंध निदेशक को दो सप्ताह के भीतर इस पर उचित निर्णय लेने को कहा है। याचिका में बताया गया कि उत्तराखंड वन विकास निगम में आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से कार्यरत कर्मचारी लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे थे। याचिकाकर्ताओं में ललित सिंह, हर्ष बडोला सहित अन्य कर्मचारी शामिल हैं। इन कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों से निगम में विभिन्न कार्यों में लगे थे, लेकिन जून 2024 से उनकी सेवाएं अचानक समाप्त कर दी गईं।
याचिका में यह भी कहा गया कि 13 मई 2024 को निगम के प्रबंध निदेशक ने स्वयं यह स्वीकार किया था कि विभाग को इन कर्मचारियों की सेवाओं की अगले पांच वर्षों तक आवश्यकता है। इसके बावजूद कुछ ही समय बाद उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं, जिससे कर्मचारियों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की कि उन्हें विभाग में काम जारी रखने का अवसर दिया जाए और सेवा समाप्ति के आदेश पर पुनर्विचार किया जाए। उनका कहना है कि लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद उन्हें किसी प्रकार का लाभ या सुरक्षा नहीं दी गई। मामले की सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने कर्मचारियों को निर्देश दिया कि वे अपना प्रतिवेदन वन विकास निगम के प्रबंध निदेशक के समक्ष प्रस्तुत करें। साथ ही अदालत ने एमडी को निर्देशित किया कि प्राप्त प्रतिवेदन पर दो सप्ताह के भीतर अपने स्तर से उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इस मामले को प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रकरण के रूप में देखा जा रहा है।