चारधाम यात्रा में अव्यवस्थाओं और पशु क्रूरता पर हाईकोर्ट सख्त, कमेटी गठित करने के निर्देश

High Court Takes Strict Stance on Chaos and Animal Cruelty During Char Dham Yatra; Directs Formation of Committee

नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने चारधाम यात्रा के दौरान तीर्थ स्थलों पर फैल रही अव्यवस्थाओं और पशुओं के साथ हो रही क्रूरता के मामले को गंभीरता से लिया है। इस संबंध में दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायालय की खंडपीठ ने तीर्थ स्थलों पर पशुओं के साथ होने वाले अत्याचार को रोकने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने निर्देश दिया कि गढ़वाल मंडल आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति बनाई जाए, जिसमें पशुपालन विभाग के अधिकारी, संबंधित तीर्थ स्थलों के जिलाधिकारी और जिला पंचायत के प्रतिनिधि शामिल हों। यह समिति तीर्थ क्षेत्रों में पशुओं की स्थिति, उनके साथ हो रहे व्यवहार और व्यवस्थाओं की समीक्षा करेगी तथा सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाएगी। मामले की अगली सुनवाई के लिए न्यायालय ने दो सप्ताह बाद की तिथि निर्धारित की है।

दरअसल, समाजसेवी गौरी मौलेखी ने इस मामले में जनहित याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि उत्तराखंड के चारधाम सहित अन्य प्रमुख तीर्थ स्थलों पर अव्यवस्था लगातार बढ़ रही है और घोड़े-खच्चरों जैसे पशुओं के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाई गई है, लेकिन उसका प्रभावी अनुपालन नहीं हो रहा है। इसलिए एक निगरानी समिति बनाकर व्यवस्थाओं को धरातल पर लागू किया जाना आवश्यक है। याचिकाकर्ता ने अदालत से यह भी मांग की कि चारधाम यात्रा में बढ़ती भीड़ को देखते हुए तीर्थ स्थलों की वहन क्षमता के अनुसार ही श्रद्धालुओं और घोड़े-खच्चरों को भेजा जाए। इससे न केवल यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी, बल्कि पशुओं पर हो रहे अत्याचार को भी रोका जा सकेगा। हाईकोर्ट की इस सख्ती को चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं में सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।