हल्द्वानी बनभूलपुरा हिंसा केस: मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, जेल से रिहाई के आदेश

Haldwani Banbhulpura Violence Case: Major Relief for Main Accused Abdul Malik from High Court; Orders Issued for Release from Jail

नैनीताल। उत्तराखंड के चर्चित हल्द्वानी बनभूलपुरा हिंसा मामले में मुख्य आरोपी और साजिशकर्ता बताए जा रहे अब्दुल मलिक को नैनीताल हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। लंबे समय से जेल में बंद मलिक की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने उन्हें रिहा करने के आदेश जारी कर दिए हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा और न्यायमूर्ति आलोक महरा की खंडपीठ ने सुनाया है।

जानकारी के अनुसार, बनभूलपुरा दंगे के दौरान अब्दुल मलिक के खिलाफ कुल चार मुकदमे दर्ज किए गए थे। इनमें से एक मामले में उन्हें पूर्व में ही जमानत मिल चुकी थी। शेष तीन मुकदमों में आज हुई सुनवाई के बाद कोर्ट ने उन्हें जमानत पर रिहा करने का फैसला सुनाया। इसके साथ ही अब मलिक की जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार से मलिक के आपराधिक इतिहास (क्रिमिनल हिस्ट्री) के बारे में जानकारी मांगी थी। पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने सरकार और आरोपी के अधिवक्ताओं से पूछा था कि अन्य सात मुकदमों की वर्तमान स्थिति क्या है? राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि जांच के दौरान सात अन्य मुकदमों की पुष्टि हुई थी, लेकिन कई मामलों में वह बरी हो चुके हैं और कुछ मुकदमों की स्पष्ट स्थिति का पता नहीं चल सका है। मुकदमों की ठोस पुष्टि न होने के कारण खंडपीठ ने आज उन्हें जमानत दे दी। मामले के अनुसार, अब्दुल मलिक पर राजकीय (नजूल) भूमि को खुर्द-बुर्द करने, कूटरचित दस्तावेज बनाने और सरकारी कार्य में व्यवधान डालने के गंभीर आरोप थे। प्रशासन का दावा था कि मलिक ने झूठे शपथपत्रों के आधार पर सरकारी जमीन हड़पी और वहां अवैध कब्जा कर प्लॉटिंग की। जब प्रशासन इस अवैध अतिक्रमण को हटाने पहुंचा, तो वहां भीषण पथराव हुआ जिसने दंगे का रूप ले लिया। इस हिंसा में कई पुलिसकर्मी और आम नागरिक घायल हुए थे और जान-माल का भारी नुकसान हुआ था। अब्दुल मलिक के अधिवक्ताओं ने कोर्ट में तर्क दिया कि उन्हें इस मामले में राजनीतिक द्वेष के चलते जबरन फंसाया गया है। उनके अनुसार, मूल एफआईआर में मलिक का नाम नहीं था और पुलिस के पास उनके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं है। उन्होंने यह भी दलील दी कि इसी मामले में शामिल 100 से अधिक अन्य आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है, ऐसे में उन्हें जेल में रखना उचित नहीं है। अब्दुल मलिक को जमानत मिलना इस हाई-प्रोफाइल केस में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। हालांकि, कोर्ट ने जमानत देते हुए कुछ शर्तें भी लागू की होंगी, लेकिन मुख्य आरोपी की रिहाई से अब इस मामले की कानूनी दिशा और अधिक जटिल हो सकती है।