भारत की सभ्यतागत चेतना की कालजयी आवाज थे गुरुदेव! रवींद्र जयंती पर पीएम मोदी ने दी भावुक श्रद्धांजलि

Gurudev was the timeless voice of India's civilizational consciousness! PM Modi pays an emotional tribute on Rabindra Jayanti.

कोलकाता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को विश्वकवि रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती (पोइला बोइशाख) के पावन अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने गुरुदेव को याद करते हुए उन्हें भारत की सभ्यतागत चेतना का प्रतीक और मानवता का मार्गदर्शक बताया। पश्चिम बंगाल समेत पूरे देश में आज 'पोइला बोइशाख' के उत्साह के बीच गुरुदेव की विरासत को नमन किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए गए एक संदेश में कहा कि गुरुदेव टैगोर का योगदान किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं था। वे एक विलक्षण कवि होने के साथ-साथ एक महान चिंतक, दार्शनिक, शिक्षाविद और अद्वितीय कलाकार भी थे। आज पोइला बोइशाख के विशेष अवसर पर हम गुरुदेव टैगोर को श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं। उन्होंने मानवता की गहरी भावनाओं और भारतीय संस्कृति के श्रेष्ठ आदर्शों को अपनी रचनाओं के माध्यम से अभिव्यक्त किया। टैगोर ने समाज को न केवल नए विचार दिए, बल्कि उसे सांस्कृतिक आत्मविश्वास से भी ओत-प्रोत किया।

प्रधानमंत्री ने प्रार्थना की कि गुरुदेव की विचारधारा आने वाली पीढ़ियों के मन को आलोकित करती रहे और राष्ट्र निर्माण के हमारे प्रयासों का मार्गदर्शन करती रहे। रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 (बंगाली पंचांग के अनुसार 25 बोइशाख) को हुआ था। वे मात्र एक लेखक नहीं, बल्कि भारतीय पुनर्जागरण के सबसे मजबूत स्तंभ थे। 1913 में अपनी कालजयी काव्य कृति 'गीतांजलि' के लिए वे साहित्य का नोबेल पुरस्कार जीतने वाले पहले एशियाई बने। गुरुदेव दुनिया के एकमात्र ऐसे कवि हैं जिनकी रचनाएं दो देशों का राष्ट्रगान बनीं भारत का 'जन गण मन' और बांग्लादेश का 'आमार सोनार बांग्ला'। उन्होंने शांतिनिकेतन में विश्वभारती विश्वविद्यालय की स्थापना कर शिक्षा को प्रकृति और संस्कृति से जोड़ने का अतुलनीय कार्य किया। गुरुदेव की जयंती के उपलक्ष्य में आज पश्चिम बंगाल के कोने-कोने में उत्सव का माहौल है। शांतिनिकेतन में सुबह से ही विशेष प्रार्थना सभाओं और प्रभात फेरियों का आयोजन किया गया। कोलकाता के जोड़ासांको ठाकुरबाड़ी' (टैगोर का पैतृक निवास) में हजारों की संख्या में प्रशंसकों ने पहुंचकर अपनी श्रद्धांजलि दी। देशभर में आयोजित हो रहे इन सांस्कृतिक कार्यक्रमों में टैगोर की कविताओं का पाठ, उनके द्वारा रचित गीतों (रवींद्र संगीत) की प्रस्तुति और नृत्य नाटकों के जरिए उनके विचारों को याद किया जा रहा है। उनकी रचनाओं में राष्ट्रवाद, प्रकृति और आध्यात्मिकता का जो अद्भुत संगम मिलता है, वह आज के आधुनिक युग में भी उतना ही प्रासंगिक है। प्रधानमंत्री का यह संदेश गुरुदेव के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता को दर्शाता है। गुरुदेव ने जिस 'विश्व बंधुत्व' और 'मानवता' का सपना देखा था, वह आज भी भारत की विदेश नीति और सामाजिक ढांचे का मूल आधार है। उनकी जयंती केवल एक तिथि नहीं, बल्कि भारतीय गौरव को फिर से जीने का एक अवसर है।