अशासकीय महाविद्यालयों में शिक्षक भर्ती पर शासन की रोक: पारदर्शिता के लिए बनेगी नई नियमावली, प्राचार्यों को वैकल्पिक व्यवस्था के निर्देश

Government puts a hold on teacher recruitment in non-government colleges: New regulations to be framed for transparency; principals directed to make alternative arrangements.

देहरादून। उत्तराखंड के अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया पर शासन ने तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। उच्च शिक्षा निदेशक प्रो. वीएन खाली ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी करते हुए सभी संबंधित महाविद्यालयों को दिशा-निर्देश भेज दिए हैं। यह फैसला एडेड कॉलेजों में भर्तियों को लेकर लगातार उठ रहे भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बाद लिया गया है।

प्रदेश के अशासकीय महाविद्यालयों में शिक्षकों की नियमित भर्ती पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। उच्च शिक्षा निदेशक प्रो. वीएन खाली ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। सरकार ने यह कदम भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और नियुक्तियों को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच उठाया है। अब नई नियमावली तैयार होने तक इन महाविद्यालयों में नियमित नियुक्तियां नहीं की जाएंगी। अशासकीय महाविद्यालयों में शिक्षकों और कर्मचारियों की भर्ती को लेकर लंबे समय से शिकायतें सामने आती रही हैं। कई मामलों में आरोप लगे कि भर्ती प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी कर चहेते अभ्यर्थियों को नियुक्तियां दी गईं। इन्हीं शिकायतों को देखते हुए सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए शासन स्तर पर समिति का गठन किया था। समिति को ऐसी व्यवस्था सुझानी है, जिसमें नियुक्ति प्रक्रिया में किसी तरह की मनमानी या पक्षपात की गुंजाइश न रहे। बताया जा रहा है कि अशासकीय महाविद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती आयोग के माध्यम से कराने का विकल्प भी सामने आया था, लेकिन इस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हो सका है। प्रकरण लंबे समय से शासन स्तर पर लंबित है। अब नई नियमावली के जरिए भर्ती प्रक्रिया को स्पष्ट और जवाबदेह बनाने की तैयारी है। भर्ती पर रोक का असर महाविद्यालयों में पठन-पाठन पर पड़ने की आशंका भी है। प्रदेश के कई अशासकीय महाविद्यालय पहले से ही शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। कुछ संस्थानों में स्वीकृत पदों के मुकाबले 40 फीसदी से भी कम शिक्षक रह गए हैं। ऐसे में नियमित भर्ती रुकने से खाली पदों को भरने की चुनौती और बढ़ सकती है। उच्च शिक्षा निदेशक के आदेश के अनुसार, नियमित भर्ती प्रक्रिया स्थगित रहने की अवधि में संबंधित महाविद्यालयों के प्राचार्य और प्रबंध समितियां अपने खर्च पर अस्थायी व्यवस्था के माध्यम से शिक्षण कार्य सुनिश्चित करेंगी। यानी विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए अस्थायी शिक्षकों या अन्य वैकल्पिक व्यवस्था का सहारा लिया जाएगा। सरकार का जोर अब ऐसी भर्ती व्यवस्था तैयार करने पर है, जिसमें योग्यता के आधार पर चयन हो और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे। नई नियमावली लागू होने के बाद ही नियमित शिक्षक भर्ती का रास्ता दोबारा खुलने की उम्मीद है। हालांकि, नियमावली तैयार होने में कितना समय लगेगा और आयोग के जरिए भर्ती कराने के प्रस्ताव पर क्या फैसला होगा, इस पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।