मित्र पुलिस या भय का पर्याय? सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने फिर खड़े किए उत्तराखंड पुलिस के रवैये पर गंभीर सवाल, युवक ने लगाए आरोप

'Friendly police' or synonymous with fear? A viral video on social media has once again raised serious questions about the Uttarakhand Police's conduct, following allegations made by a young man.

देहरादून। यूं तो उत्तराखंड पुलिस खुद को ‘मित्र पुलिस’ के रूप में पेश करती है, लेकिन समय-समय पर कई ऐसे मामले सामने आते रहते हैं, जो मित्र पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हैं। दरअसल, पिछले दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वर्दी पहने एक पुलिसकर्मी एक युवक को लगातार थप्पड़ मारता हुआ दिखाई दे रहा था। वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने पुलिस की कार्रवाई और उसके तौर-तरीकों पर सवाल उठाए थे। मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब इसी घटना से जुड़ा एक दूसरा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में युवक अपना नाम सचिन भंडारी निवासी पिथौरागढ़, बताते हुए दावा करता है कि उसने पुलिसकर्मी से केवल इतना पूछा था कि, ‘सर, आपने मुझे धक्का क्यों मारा?’ इसके बाद कथित तौर पर उसके साथ मारपीट की गई। वीडियो में वह अपने शरीर पर चोट के निशान भी दिखाता है और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाता है। युवक का कहना है कि उसके साथ ऐसा व्यवहार किया गया, जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी। हालांकि आवाज इंडिया वायरल वीडियो और लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं करता है, लेकिन सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे इन वीडियो ने उत्तराखंड पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग यह पूछ रहे हैं कि यदि कोई नागरिक केवल सवाल पूछे तो क्या उसके साथ इस प्रकार का व्यवहार उचित माना जा सकता है? वहीं इस मामले को लेकर जहां युवाओं में रोष देखने को मिल रहा है, वहीं सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गयी है। मामले को लेकर युवाओं ने जोरदार नारेबाजी के बीच पुतला फूंकते हुए पुलिसकर्मी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है।

पहले भी लग चुके हैं गंभीर आरोप
यह पहला मौका नहीं है जब उत्तराखंड पुलिस विवादों में आई हो। इससे पहले भी कई मामलों में मित्र पुलिस पर आम नागरिकों के साथ मारपीट और अमानवीय व्यवहार के आरोप लग चुके हैं। कुछ समय पहले टिहरी जिले के लंबगांव थाना पुलिस पर केशव थलवाल ने गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि पुलिस ने उन्हें निर्वस्त्र कर डंडों और बेल्ट से पीटा, जबरन पेशाब पिलाया, थूका हुआ पानी पीने के लिए मजबूर किया और पुलिसकर्मियों के जूते तक चटवाए। इन आरोपों के सामने आने के बाद पूरे प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। विपक्ष ने सरकार को घेरा तो तमाम संगठनों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई थी।

पूर्व एसपी भी हो चुके हैं दोषी करार
पिथौरागढ़ से जुड़ा एक और मामला भी उत्तराखंड पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। वर्ष 2023 में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक रहे लोकेश्वर सिंह को उत्तराखंड राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण ने शिकायतकर्ता के साथ मारपीट और अभद्रता के मामले में दोषी माना था। दरअसल, पिथौरागढ़ के ओल्ड मार्केट स्थित मंगलम गारमेंट्स के निवासी लक्ष्मी दत्त जोशी ने 8 फरवरी 2023 को नैनीताल जिला पुलिस शिकायत प्राधिकरण में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार 6 फरवरी 2023 को तत्कालीन एसपी और अन्य पुलिसकर्मियों ने उन्हें पुलिस अधीक्षक कार्यालय में बुलाकर कथित रूप से मारपीट की, निर्वस्त्र किया और उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। जोशी ने अपनी शिकायत के समर्थन में मेडिकल रिपोर्ट और एक्स-रे भी प्रस्तुत किए थे, जिनमें चोटों का उल्लेख किया गया था। यह मामला उस समय पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना था। बता दें कि इस मामले को आवाज इंडिया ने सबसे पहले प्रमुखता से उठाया था।

उठ रहे हैं कई अहम सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग
अब पिथौरागढ़ के ताजा वायरल वीडियो ने एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या आम नागरिक के साथ पुलिस का ऐसा व्यवहार स्वीकार्य है? क्या पुलिस बल में संवेदनशीलता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था है? क्या ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होती है? क्या मित्र पुलिस की अवधारणा केवल नारों तक सीमित रह गई है? फिलहाल, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि पुलिस पर लगे आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल एक व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं बल्कि पूरे पुलिस तंत्र की छवि पर प्रश्नचिह्न है।