लाइनमैन की करंट से मौत: सीएम धामी ने परिजनों से फोन पर की बात,हर संभव मदद का दिया भरोसा

Lineman dies of electrocution: CM Dhami speaks to the family over the phone, assures all possible assistance.

खटीमा। जनपद ऊधम सिंह नगर के खटीमा में बीते दिन बिजली ट्रांसफार्मर पर काम करते समय करंट लगने से संविदा (कॉन्ट्रेक्ट) लाइनमैन रंजीत सिंह राणा की दुखद मौत के मामले को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बेहद गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री ने शनिवार को मृतक लाइनमैन के शोक संतप्त परिजनों से फोन पर लंबी वार्ता की। उन्होंने इस दर्दनाक हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए माता-पिता को ढांढस बंधाया और आश्वासन दिया कि इस मुश्किल घड़ी में राज्य सरकार पूरी तरह से पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है।

लाइनमैन रंजीत सिंह राणा की मौत के बाद से ही उनके गृह क्षेत्र नौगावनाथ और परिजनों में भारी आक्रोश और शोक की लहर है। घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए खटीमा के वरिष्ठ भाजपा नेता नवीन भट्ट पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मृतक के आवास पर पहुंचे। वहां उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मृतक के माता-पिता से फोन पर सीधी बात कराई। मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार से कहा कि सरकार उनके प्रति पूरी संवेदनशीलता रखती है और उन्हें अकेले नहीं छोड़ा जाएगा। बातचीत के दौरान भावुक माता-पिता ने अपने बेटे की आकस्मिक मृत्यु के बाद परिवार के सामने खड़े हुए आर्थिक संकट का जिक्र किया और मुआवजे की मांग की, जिस पर सीएम ने हरसंभव त्वरित सहायता का भरोसा दिया। यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि बिजली विभाग की एक बड़ी और जानलेवा लापरवाही की ओर इशारा कर रहा है। परिजनों और स्थानीय लोगों ने विद्युत विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रंजीत सिंह राणा खटीमा विद्युत विभाग में ठेकेदार के अंतर्गत लाइनमैन का काम करता था। परिजनों का आरोप है कि ट्रांसफार्मर पर चढ़ने से पहले नियमानुसार 'शटडाउन' (बिजली आपूर्ति बंद करने की अनुमति) मांगा गया था। शटडाउन मिलने के बाद ही रंजीत ऊपर चढ़ा, लेकिन लापरवाही के कारण लाइन कट नहीं की गई। रनिंग लाइन में करंट आ जाने की वजह से रंजीत की मौके पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे के बाद से स्थानीय निवासियों में बिजली विभाग के गैर-जिम्मेदाराना रवैये को लेकर भारी गुस्सा है। परिजनों ने साफ कहा है कि जब तक इस घोर लापरवाही के लिए जिम्मेदार बिजली कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं होती और मृतक की पत्नी को जीवनयापन के लिए नौकरी नहीं दी जाती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। मुख्यमंत्री के सीधे हस्तक्षेप और आश्वासन के बाद अब प्रशासन और विभाग बैकफुट पर है और मामले की आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है।