Aug 30, 2026 Login

नेपाल त्रासदीः अस्पताल फुल, शवों से आने लगी दुर्गंध! फ्लैश फ्लड के बाद अब महामारी का खतरा! मृतकों की पहचान और अंतिम संस्कार बना बड़ी चुनौती

 Nepal Tragedy: Hospitals full, bodies beginning to decompose and emit a stench! After flash floods, the threat of an epidemic looms; identifying and cremating the deceased has become a major challen

नई दिल्ली। नेपाल में विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद तबाही का मंजर लगातार गहराता जा रहा है। राहत और बचाव अभियान के बीच प्रभावित इलाकों से बड़ी संख्या में शव बरामद होने के बाद अब प्रशासन के सामने एक नई और गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है। अब तक 579 से अधिक शव बरामद किए जा चुके हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे शवों की है, जिनकी अभी तक पहचान नहीं हो पाई है। पहचान नहीं होने के कारण अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में देरी हो रही है और कई शव तेजी से खराब होने लगे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में शवों से आने वाली दुर्गंध और सीमित संसाधनों के बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बीमारियों और संक्रमण के संभावित प्रसार को लेकर चिंता जताई है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में अभी भी लापता लोगों की तलाश जारी है। सुरक्षाकर्मी और राहत दल मलबे तथा प्रभावित क्षेत्रों में लगातार खोज अभियान चला रहे हैं। इस दौरान अलग-अलग स्थानों से शव मिलने का सिलसिला जारी है। बड़ी संख्या में शव मिलने के कारण अस्पतालों और शवगृहों की क्षमता भी जवाब देने लगी है। कई स्थानों पर शवों को सुरक्षित रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ रही है। सबसे गंभीर स्थिति चितवन जिले में सामने आई है। यहां अब तक 178 शव बरामद किए जा चुके हैं। इनमें 74 पुरुष, 41 महिलाएं और आठ बच्चे शामिल हैं। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन शवों की पहचान और सुरक्षित प्रबंधन की है। चितवन के मुख्य जिला अधिकारी गणेश आर्यल के मुताबिक, लगातार चल रहे खोज अभियान के दौरान बड़ी संख्या में शव मिलने से उनके सुरक्षित रखरखाव की समस्या पैदा हो गई है। अस्पताल में शव रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं बची है। ऐसे में शवों को फिलहाल एक सरकारी कार्यालय में रखा जा रहा है, ताकि उनकी पहचान की प्रक्रिया पूरी की जा सके। हालांकि लगातार कई शव मिलने और उन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई है। अधिकारियों के मुताबिक कुछ शव तेजी से खराब होने की स्थिति में पहुंच चुके हैं और पहचान के लिए रखे गए स्थानों पर दुर्गंध भी फैलने लगी है। नेपाल में बाढ़ के बाद एक साथ बड़ी संख्या में शव मिलने से शवों को सुरक्षित रखने के लिए उपलब्ध संसाधन कम पड़ रहे हैं। महामारी विज्ञान और रोग नियंत्रण विभाग ने भी मौजूदा परिस्थितियों को लेकर चिंता जताई है। विभाग के निदेशक डॉ. अनुज भट्टाचन के मुताबिक, जिन शवों की पहचान नहीं हुई है, उन्हें पहचान पूरी होने तक उचित तापमान पर सुरक्षित रखना जरूरी है। लेकिन अचानक बड़ी संख्या में शव पहुंचने के कारण मौजूदा कोल्ड स्टोरेज और रेफ्रिजरेशन क्षमता पर दबाव बढ़ गया है। यही वजह है कि प्रशासन को शवों के प्रबंधन के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं करनी पड़ रही हैं। धाडिंग में बरामद कुछ शवों को बेहतर संरक्षण के लिए काठमांडू और पोखरा स्थानांतरित किया गया है। इससे शवों को सुरक्षित रखने के साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

बिना पहचान वाले शवों का होगा अंतिम संस्कार
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नेपाल सरकार अब बिना पहचान वाले शवों के अंतिम संस्कार की दिशा में आगे बढ़ रही है। सरकार की योजना है कि जिन शवों की तत्काल पहचान नहीं हो पा रही है, उनका आवश्यक प्रक्रिया के तहत अंतिम संस्कार किया जाए। हालांकि भविष्य में परिजनों की पहचान और शवों से संबंधित जानकारी जुटाने के लिए प्रत्येक अज्ञात शव का डीएनए नमूना सुरक्षित रखा जाएगा। सरकार के सामने यह तय करना भी चुनौती है कि शवों का अंतिम संस्कार प्रभावित जिलों में ही किया जाए या उन्हें काठमांडू जैसे बड़े केंद्रों तक लाकर प्रक्रिया पूरी की जाए। इसको लेकर गृह मंत्रालय संबंधित जिला प्रशासन के साथ लगातार समन्वय कर रहा है। नेपाल गृह मंत्रालय के अनुसार, रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा, चितवन और नवलपरासी समेत कई प्रभावित जिलों में राहत और खोज अभियान के दौरान लगातार शव बरामद किए जा रहे हैं। पहाड़ी और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भौगोलिक परिस्थितियां राहत एवं बचाव अभियान को और कठिन बना रही हैं। प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल लापता लोगों की तलाश, बरामद शवों की पहचान, उन्हें सुरक्षित रखने और निर्धारित प्रक्रिया के तहत अंतिम संस्कार करने की है। इसके साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में साफ-सफाई और स्वास्थ्य सेवाओं को बनाए रखना भी बड़ी चुनौती बन गया है।

अस्पतालों और स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ा दबाव
बाढ़ से पहले ही प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव था। अब बड़ी संख्या में शवों के पहुंचने और राहत शिविरों में लोगों की संख्या बढ़ने के कारण स्थानीय स्वास्थ्य तंत्र के सामने अतिरिक्त चुनौती पैदा हो गई है। प्रशासन को एक तरफ घायलों और बीमार लोगों का उपचार सुनिश्चित करना है, वहीं दूसरी तरफ शवों की पहचान और सुरक्षित प्रबंधन की व्यवस्था भी करनी पड़ रही है। अस्पतालों में शव रखने की क्षमता सीमित होने के कारण वैकल्पिक स्थानों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इधर संभावित स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए नेपाल गृह मंत्रालय प्रभावित जिलों के प्रशासन के साथ मिलकर शवों के त्वरित प्रबंधन की रणनीति तैयार कर रहा है। सरकार यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि पहचान की प्रक्रिया और अंतिम संस्कार में अनावश्यक देरी न हो। अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि एक ओर बड़ी संख्या में शव लगातार बरामद हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हें सुरक्षित रखने की क्षमता सीमित है। ऐसे में शवों को उपयुक्त स्थानों पर स्थानांतरित करने और जल्द से जल्द अंतिम प्रक्रिया पूरी करने पर जोर दिया जा रहा है।