एसआईआर की समय-सीमा 15 अगस्त तक बढ़ाने की मांग, चुनाव आयुक्त का भरोसा-किसी पात्र मतदाता का नाम नहीं कटेगा

Demand to extend SIR deadline to August 15; Election Commissioner assures no eligible voter's name will be deleted.

रांची। झारखंड में चल रही विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष शमशेर आलम ने चुनाव आयुक्त के. रवि कुमार को मांग पत्र सौंपते हुए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उन्होंने एसआईआर की मौजूदा समय-सीमा को बढ़ाकर कम से कम 15 अगस्त तक करने की मांग की है। साथ ही यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम बिना उचित जांच और सूचना के मतदाता सूची से न हटाया जाए। इस पर चुनाव आयुक्त ने स्पष्ट आश्वासन दिया कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से बाहर नहीं होगा और पूरी प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कराई जाएगी।

शमशेर आलम ने अपने मांग पत्र में कहा कि राज्य के कई जिलों में एसआईआर का कार्य संतोषजनक ढंग से चल रहा है, लेकिन अनेक जिलों, विशेषकर अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा पिछड़े वर्ग की अधिक आबादी वाले इलाकों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं। शिकायतों के अनुसार, बड़ी संख्या में मतदाताओं तक अब तक गणना प्रपत्र नहीं पहुंच पाया है। कई स्थानों पर बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) अपनी जिम्मेदारियों का समुचित निर्वहन नहीं कर रहे हैं, जिससे पात्र मतदाताओं को प्रक्रिया में शामिल होने में कठिनाई हो रही है। ज्ञापन में कहा गया है कि वर्तमान प्रगति को देखते हुए 29 जुलाई तक एसआईआर की प्रक्रिया पूरी होना व्यावहारिक नहीं लगता। इसलिए समय-सीमा बढ़ाकर कम से कम 15 अगस्त तक की जाए, ताकि प्रत्येक पात्र मतदाता तक गणना प्रपत्र पहुंच सके और सभी को आवेदन एवं आवश्यक दस्तावेज जमा करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। उन्होंने यह भी मांग की कि सभी बीएलओ को घर-घर जाकर गणना प्रपत्र वितरित करने के निर्देश दिए जाएं। यदि किसी मतदाता को प्रक्रिया की जानकारी नहीं है, तो उसे आवश्यक मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जाए। साथ ही बीएलओ को बेहतर प्रशिक्षण और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि पुनरीक्षण कार्य बिना किसी त्रुटि के पूरा हो सके। मांग पत्र में यह भी कहा गया है कि दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों, बुजुर्गों, दिव्यांगों और आर्थिक रूप से कमजोर मतदाताओं के लिए विशेष सहायता शिविर लगाए जाएं, जिससे वे आसानी से अपने दस्तावेज जमा कर सकें। इसके अलावा दावों और आपत्तियों के त्वरित, निष्पक्ष और पारदर्शी निपटारे की व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है। शमशेर आलम ने कहा कि इन सभी सुझावों का उद्देश्य निर्वाचन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष, समावेशी और विश्वसनीय बनाना है। उनका कहना है कि मतदाता सूची का शुद्धिकरण आवश्यक है, लेकिन इसके साथ-साथ प्रत्येक पात्र नागरिक के मताधिकार की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इस पर चुनाव आयुक्त के. रवि कुमार ने स्पष्ट किया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही या गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी अनियमितता करता पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम किसी भी कीमत पर मतदाता सूची से नहीं काटा जाएगा। वहीं, जो व्यक्ति नियमों के अनुसार अयोग्य होंगे, उनका नाम दोबारा सूची में शामिल नहीं किया जाएगा। चुनाव आयुक्त ने कहा कि पूरी एसआईआर प्रक्रिया निष्पक्षता, पारदर्शिता और निर्धारित नियमों के अनुरूप संचालित की जाएगी, ताकि मतदाता सूची पूरी तरह शुद्ध और विश्वसनीय बन सके।