जी7 के मंच पर मोदी-ट्रंप की अहम मुलाकात आज! व्यापार, ऊर्जा और वैश्विक संकटों पर होगी निर्णायक चर्चा

Crucial meeting between Modi and Trump at the G7 summit today! Decisive discussions to be held on trade, energy, and global crises.

नई दिल्ली। वैश्विक कूटनीति के मंच से आज एक बेहद बड़ी और निर्णायक खबर सामने आ रही है। इटली में आयोजित 52वें जी7 शिखर सम्मेलन के इतर आज, 17 जून को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच एक बेहद अहम द्विपक्षीय बैठक होने जा रही है। पूरी दुनिया की नजरें इस महाबैठक पर टिकी हैं, क्योंकि इसमें न सिर्फ दोनों देशों के बीच लंबे समय से लंबित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है, बल्कि पश्चिम एशिया में गहराते संकट और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर भी रणनीतिक चर्चा होनी तय है। व्हाइट हाउस और भारतीय राजनयिक सूत्रों ने पुष्टि की है कि दोनों नेताओं की इस मुलाकात में आर्थिक सहयोग, रक्षा और दीर्घकालिक ऊर्जा साझेदारी को एक नए मुकाम पर ले जाने का खाका तैयार किया जाएगा।

इस बैठक का सबसे बड़ा और सकारात्मक पहलू भारत-अमेरिका व्यापार समझौता है, जो अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच पिछले एक साल से इस समझौते को लेकर सघन बातचीत चल रही थी, जिसके बाद इसी साल फरवरी में एक अंतरिम व्यापार समझौता किया गया था। अब आने वाले कुछ ही हफ्तों में इस ऐतिहासिक समझौते पर काम पूरी तरह संपन्न होने की उम्मीद है। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि आज होने वाली इस द्विपक्षीय वार्ता में इस प्रस्तावित व्यापार समझौते को तेजी से आगे बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा। यह उच्च स्तरीय बैठक एक ऐसे नाजुक समय में हो रही है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी अस्थिरता ने दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों और समुद्री व्यापार की कमर तोड़ रखी है। ज्ञात हो कि यह संकरा समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है। इस मार्ग पर पैदा हुए गतिरोध के कारण भारत जैसे विकासशील देशों की ऊर्जा सुरक्षा दांव पर है, इसलिए पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच अमेरिका से भारत को होने वाले ऊर्जा आयात को बढ़ाने और इस क्षेत्र में एक मजबूत, दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी विकसित करने पर गहन विमर्श होगा। इससे पहले मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी ने जी7 शिखर सम्मेलन के मुख्य सत्र "नए साझेदारी संबंधों का निर्माण और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता की पुनर्बहाली" को संबोधित करते हुए वैश्विक संघर्षों पर गहरी चिंता जताई। पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया के शांति प्रयासों का स्वागत तो किया, लेकिन इसके मानवीय और आर्थिक नुकसानों को लेकर दुनिया को आगाह भी किया। प्रधानमंत्री मोदी ने ओमान की खाड़ी में हुई हालिया हिंसक समुद्री घटना का परोक्ष रूप से जिक्र करते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री व्यापार प्रभावित होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान हुआ है। इस संघर्ष में कई भारतीय नागरिकों को भी अपनी जान गंवानी पड़ी है। (बता दें कि ईरानी तेल ले जा रहे पलाऊ के झंडे वाले एक तेल टैंकर पर अमेरिकी बलों की कार्रवाई के दौरान तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी। पीएम मोदी ने कड़े शब्दों में कहा कि वैश्विक समुद्री व्यापार से जुड़े नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पूरी अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दुनिया के किसी भी संकट का स्थायी समाधान केवल संवाद, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ही निकाला जा सकता है। इस बार भारत को 'साझेदार देश' के रूप में जी7 शिखर सम्मेलन में विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। आउटरीच प्रक्रिया के तहत इस प्रतिष्ठित वैश्विक मंच पर भारत की यह 13वीं भागीदारी है, जो यह दर्शाती है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और रणनीतिक संतुलन बनाए रखने में अब भारत की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आज होने वाली मोदी-ट्रंप की यह मुलाकात आने वाले समय में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र और वैश्विक राजनीति की नई दिशा तय करेगी।