रुद्रपुर की पहली बीडीसी बैठक में ज़बरदस्त हंगामा: राशन कार्ड पर '₹2000 घूस' के आरोप से भड़के प्रधान, अफसरों को छोड़ना पड़ा मैदान

Uproar at Rudrapur's first BDC meeting: Village heads enraged by allegations of a '₹2,000 bribe' for ration cards; officials forced to leave the venue.

रुद्रपुर। रुद्रपुर ब्लॉक कार्यालय में आयोजित चालू वित्तीय वर्ष की पहली क्षेत्र पंचायत (बीडीसी) बैठक भारी हंगामे और ड्रामे की भेंट चढ़ गई। ग्रामीण क्षेत्रों में राशन कार्ड बनाने और संशोधन के नाम पर हो रही कथित रिश्वतखोरी से आक्रोशित ग्राम प्रधानों ने जिला पूर्ति विभाग के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया। ग्राम प्रधानों ने गंभीर आरोप लगाया कि खाद्य आपूर्ति विभाग में बिना पैसे दिए कोई काम नहीं हो रहा है और एक-एक राशन कार्ड जारी करने के एवज में ग्रामीणों से दो-दो हजार रुपये की अवैध वसूली की जा रही है।

ऊधम सिंह नगर के रुद्रपुर में वित्तीय वर्ष की पहली ब्लॉक विकास समिति (बीडीसी) बैठक मंगलवार को उस समय हंगामे में बदल गई, जब बड़ी संख्या में ग्राम प्रधानों ने जिला पूर्ति अधिकारी (डीएसओ) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। राशन कार्ड बनाने और संशोधन के नाम पर कथित तौर पर ₹2,000 रिश्वत लिए जाने के आरोपों को लेकर प्रधानों ने बैठक में जमकर विरोध प्रदर्शन किया। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि जिला पूर्ति अधिकारी विनोद चंद्र तिवारी को बैठक बीच में छोड़कर बाहर जाना पड़ा। बैठक के दौरान ग्राम प्रधानों ने आरोप लगाया कि खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में बिना पैसे दिए कोई काम नहीं हो रहा है। उनका कहना था कि पात्र लोगों के राशन कार्ड बनाने, संशोधन कराने और अन्य कार्यों के लिए लोगों से ₹2,000 तक की रिश्वत मांगी जा रही है। इससे ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रधानों के आरोपों के बीच डीएसओ विनोद चंद्र तिवारी ने अपनी बात रखकर स्थिति शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन विरोध लगातार बढ़ता गया। नाराज प्रधानों ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी, जिसके बाद माहौल और अधिक गरमा गया। बढ़ते हंगामे के बीच डीएसओ को बैठक छोड़कर जाना पड़ा। डीएसओ के जाने के बाद भी ग्राम प्रधानों का आक्रोश शांत नहीं हुआ। उन्होंने ब्लॉक कार्यालय परिसर में धरना शुरू कर दिया और स्पष्ट कहा कि जब तक जिला पूर्ति अधिकारी सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते और समस्याओं के समाधान का ठोस आश्वासन नहीं देते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

ग्राम प्रधानों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से राशन कार्ड बनाने, संशोधन कराने और वितरण से जुड़ी समस्याएं बनी हुई हैं। कई पात्र परिवार आज भी राशन कार्ड से वंचित हैं, जिसके कारण उन्हें सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारियों की लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार के कारण आम लोगों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। प्रदर्शनकारी प्रधानों ने यह भी आरोप लगाया कि खाद्य पूर्ति विभाग समस्याओं के समाधान को लेकर गंभीर नहीं है। उनका कहना है कि ग्रामीणों की शिकायतों का समय पर निस्तारण नहीं किया जाता और उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान किया जाता है। इसी वजह से लोगों में विभाग के प्रति असंतोष लगातार बढ़ रहा है। धरना दे रहे ग्राम प्रधानों ने जिला पूर्ति अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उनके तबादले की मांग भी की। उनका कहना है कि जिले में किसी जिम्मेदार और संवेदनशील अधिकारी की नियुक्ति की जाए, ताकि राशन कार्ड से संबंधित मामलों का समयबद्ध निस्तारण हो सके और ग्रामीणों को राहत मिल सके। धरना-प्रदर्शन में प्रधान संघ अध्यक्ष मरिंद्र यादव सहित जयपाल कश्यप, अमन कश्यप, नंदलाल चादर, दिनेश सिंह सोलंकी, गफ्फार खान, रहमान, हरीश भट्ट, आशीष यादव, विजय यादव, मनदीप वर्मा और रीना गौतम समेत बड़ी संख्या में ग्राम प्रधान मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग की। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने जिले के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, रिश्वत लेने के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारी की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इन आरोपों की जांच कर क्या कार्रवाई करता है और ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।