नैनीताल की हरियाली पर एक और कंक्रीट की गहरी चोट!बोट हाउस क्लब के सामने स्थित ब्रिटिश कालीन पार्क में हरियाली उजाड़ कर बन रहा है कंक्रीट का स्मारक स्थल! पुनीत टंडन ने की 24 घंटे में ढांचा हटाने की मांग
नैनीताल के बोट हाउस क्लब के ठीक सामने स्थित ब्रिटिश कालीन पार्क में जारी कंक्रीट निर्माण कार्य को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मां नयना देवी नैनीताल व्यापार मंडल के संस्थापक अध्यक्ष पुनीत टंडन ने पार्क की मौजूदा स्थिति पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए इसे शहर की हरियाली, बच्चों के अधिकारों और नैनीताल की मूल पहचान पर आघात बताया है।

पुनीत टंडन ने कहा कि यह वही पार्क है, जिसे तत्कालीन नगर पालिका ईओ राहुल आनंद के कार्यकाल में मां नयना देवी व्यापार मंडल द्वारा गोद लेकर बच्चों के लिए विकसित किए जाने का प्रयास किया गया था, लेकिन किन्हीं कारणों के चलते और अधिकारियों के स्थानांतरण के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। उन्होंने कहा कि कभी यह स्थान हरियाली, खुली धूप, स्वच्छ वातावरण और बच्चों की रचनात्मक गतिविधियों का केंद्र हुआ करता था, जहां कला प्रतियोगिताएं आयोजित होती थीं और शहर के बच्चे प्राकृतिक परिवेश के बीच अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते थे। आज उसी स्थल पर सीमेंट और कंक्रीट का विस्तार दिखाई दे रहा है।
पुनीत टंडन के अनुसार, उत्तराखंड राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में यहां एक स्मारक निर्माण की तैयारी की जा रही है, जिसके लिए पार्क की हरित पहचान को समाप्त किया जा रहा है। उनका कहना है कि स्मारक निर्माण के लिए शहर में अन्य उपयुक्त स्थान उपलब्ध हो सकते हैं, लेकिन बच्चों के लिए सुरक्षित, प्राकृतिक और खुले पार्क पहले से ही बेहद सीमित हैं। ऐसे में झील के किनारे स्थित इस पार्क को कंक्रीट संरचना में बदलना उचित नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुमाऊं आयुक्त एवं सचिव मुख्यमंत्री दीपक रावत द्वारा भी इस परियोजना पर आपत्ति दर्ज किए जाने के बावजूद बीते दो दिनों से निर्माण कार्य पुनः शुरू कर दिया गया है। ताजा जानकारी का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि अमृत योजना के तहत नगर पालिका द्वारा लगभग 49 लाख रुपये की लागत से यह कार्य स्वीकृत किया गया है, जिसमें से करीब 24 लाख रुपये की राशि ठेकेदार को जारी की जा चुकी है तथा शेष भुगतान उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) प्रस्तुत होने के बाद किया जाना है।
पुनीत टंडन ने आशंका जताई कि यदि आपत्तियों के बाद इस कंक्रीट निर्माण को हटाने का निर्णय लिया जाता है तो अतिरिक्त वित्तीय भार भी जनता पर पड़ सकता है और परियोजना की कुल लागत 50 लाख रुपये से अधिक पहुंच सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि निर्माण कार्य तत्काल नहीं रोका गया तो मां नयना देवी नैनीताल व्यापार मंडल न्यायिक प्रक्रिया अपनाने के लिए बाध्य होगा। उनका दावा है कि नैनी झील के अत्यंत निकट इस प्रकार का निर्माण कार्य माननीय उच्च न्यायालय के पूर्व आदेशों की भावना के भी विपरीत है और न्यायालय से इस मामले में राहत मिलने की पूरी संभावना है।
पुनीत टंडन ने बताया कि राज्यपाल से हुई अपनी मुलाकात के दौरान भी उन्होंने नैनीताल में बच्चों के लिए समुचित पार्कों की कमी का मुद्दा उठाया था। उन्होंने विशेष रूप से इस पार्क को व्यापार मंडल द्वारा गोद लेकर पुनः हरित स्वरूप में विकसित करने, इसकी पुरानी सुंदरता बहाल करने और इसे नैनीताल के लिए एक ग्रीन लैंडमार्क के रूप में स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। उनका कहना है कि यह परियोजना पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत शहर में जनभागीदारी आधारित विकास का एक बेहतर उदाहरण बन सकती है।
उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि व्यापार मंडल को इस पार्क को गोद लेने की अनुमति प्रदान की जाए। यदि ऐसा संभव न हो सके तो कम से कम आगामी 24 से 48 घंटों के भीतर पार्क में निर्मित कंक्रीट संरचना को हटाया जाए। अन्यथा व्यापार मंडल जनहित में आगे की वैधानिक एवं न्यायिक कार्रवाई करने के लिए बाध्य होगा।