कम बारिश की आशंका पर केंद्र 'अलर्ट मोड' पर: पीएम मोदी ने 10 मंत्रालयों को दिए आपातकालीन योजना के निर्देश
नई दिल्ली। देश में आगामी महीनों में कम बारिश की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार पूरी तरह से सतर्क और एक्शन मोड में आ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक उच्च स्तरीय केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में स्थिति की व्यापक समीक्षा की। मानसून की अनिश्चितताओं से निपटने और आम जनजीवन को प्रभावित होने से बचाने के लिए पीएम मोदी ने सरकार के 10 प्रमुख मंत्रालयों को आपसी तालमेल के साथ युद्धस्तर पर काम करने और 'आपातकालीन योजना' (इमरजेंसी प्लान) तैयार रखने का कड़ा निर्देश दिया है। इसके साथ ही, कैबिनेट ने देश के 80 करोड़ से अधिक गरीब कल्याण योजना के लाभार्थियों के हित में एक और ऐतिहासिक फैसला लेते हुए राशन में मिलने वाले चावल की गुणवत्ता में 30 साल बाद सबसे बड़ा सुधार करने की मंजूरी दी है।
मौसम विभाग द्वारा जुलाई महीने में देश के कई हिस्सों में मासिक औसत वर्षा सामान्य से कम रहने की आशंका जताए जाने के बाद सरकार कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने साफ किया है कि तैयारियों में किसी भी स्तर पर ढिलाई या विभागों के बीच आपसी तालमेल की कमी को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय और ऊर्जा मंत्रालय सहित सरकार के 10 प्रमुख विभाग इस पूरी स्थिति पर 24 घंटे नजर रखेंगे। ये सभी मंत्रालय मिलकर एक साझा एक्शन प्लान बनाएंगे। इन्हें जमीनी स्तर पर पानी के स्तर, फसलों की स्थिति और बिजली की मांग का लगातार आकलन करने तथा रियल-टाइम में डेटा साझा करने को कहा गया है ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत कदम उठाए जा सकें। सरकार का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि कम बारिश के कारण देश में कृषि, पानी की उपलब्धता और बिजली की आपूर्ति जैसे बेहद जरूरी क्षेत्रों पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े। वही कैबिनेट बैठक में लिए गए दूसरे बड़े फैसले की जानकारी देते हुए केंद्रीय खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की अनाज सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए एक युगांतरकारी निर्णय लिया गया है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत दिए जाने वाले चावल के गुणवत्ता मानकों में करीब तीन दशक (30 साल) बाद पहली बार इतना बड़ा सुधार किया गया है। अब राशन की दुकानों के माध्यम से लाभार्थियों को वितरित किए जाने वाले चावल में 'टूटे हुए चावल' की मात्रा को भारी कटौती कर बेहद कम कर दिया गया है। इस नई नीति के तहत राशन के चावल से निकलने वाले टूटे हुए चावल का इस्तेमाल अब प्रोसेसिंग कार्यों (जैसे इथेनॉल उत्पादन) और जानवरों के चारे के लिए किया जाएगा। वहीं साफ और साबुत चावल सीधे जनता तक पहुंचेगा। वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने और लीकेज को रोकने के लिए अनाज के कट्टों पर 'क्यूआर कोड' का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे हर दाने की ट्रैकिंग हो सकेगी। वर्तमान में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत सरकार हर पात्र व्यक्ति को हर महीने 5 किलोग्राम अनाज मुफ्त देती है, जबकि अंत्योदय परिवारों को 35 किलोग्राम अनाज मिलता है। फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया को इस नए मानक के तहत तुरंत खरीद और वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दे दिए गए हैं।