ब्रिटेन का ग्रूमिंग गैंग कांड फिर चर्चा में: पिंजरे में बंद लड़कियां, 700 मर्दों ने किया रेप! अत्याचार की सारी हदें पार! ब्रिटिश संसद में पहली बार बताया गया ग्रूमिंग गैंग का धर्म

Britain's grooming gang scandal back in the spotlight: Girls held captive, raped by 700 men! Atrocities beyond all limits! The religion of the grooming gang revealed in the British Parliament for the

नई दिल्ली। लंदन (ब्रिटेन) में पिछले दो दशकों से विवाद और बहस का केंद्र रहे "ग्रूमिंग गैंग" मामले ने एक बार फिर पूरे देश को झकझोर दिया है। ब्रिटिश संसद में हाल ही में हुई चर्चा के दौरान सांसद रूपर्ट लोव ने कई पीड़िताओं की गवाहियां पढ़कर सुनाईं, जिनमें संगठित बाल यौन शोषण, धमकी, मानसिक प्रताड़ना और सरकारी संस्थाओं की कथित विफलताओं के गंभीर आरोप शामिल थे। संसद में पढ़ी गई गवाहियों में कई महिलाओं ने दावा किया कि किशोरावस्था के दौरान उनका वर्षों तक यौन शोषण किया गया। सबसे अधिक चर्चा उस पीड़िता की गवाही की हुई जिसने कहा कि 13 से 16 वर्ष की आयु के बीच लगभग तीन वर्षों तक उसका लगातार शोषण हुआ और इस दौरान 600 से 700 अलग-अलग पुरुषों ने उसके साथ दुष्कर्म किया। एक अन्य महिला ने बताया कि बचपन में उसके साथ ऐसी अमानवीय बर्बरता हुई जिसकी कल्पना तक नहीं की जा सकती। पीड़िताओं के आरोप केवल अपराधियों तक सीमित नहीं हैं। कई महिलाओं का कहना है कि उन्होंने पुलिस, अस्पतालों, स्थानीय प्रशासन और बाल संरक्षण एजेंसियों को अपनी पीड़ा बताई, लेकिन समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। राजनीतिक और सामाजिक संवेदनशीलताओं के कारण कई महत्वपूर्ण शिकायतों को वर्षों तक गंभीरता से नहीं लिया गया।

आखिर क्या है ग्रूमिंग गैंग?
ग्रूमिंग उस प्रक्रिया को कहा जाता है जिसमें अपराधी पहले किसी बच्चे या किशोर का विश्वास जीतते हैं, फिर उसे भावनात्मक, सामाजिक या आर्थिक रूप से अपने प्रभाव में लेकर यौन शोषण का शिकार बनाते हैं। ब्रिटेन में सामने आए कई मामलों में आरोपियों द्वारा दोस्ती, उपहार, प्रेम संबंधों का झांसा, नशा और धमकियों के जरिए लड़कियों को जाल में फंसाने के आरोप लगे हैं। राष्ट्रीय ऑडिट और विभिन्न जांच रिपोर्टों में कुछ क्षेत्रों में दोषियों के बीच पाकिस्तानी मूल के पुरुषों का अनुपात अपेक्षाकृत अधिक पाए जाने का उल्लेख किया गया है। हालांकि रिपोर्टों ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी पूरे समुदाय को अपराधों के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। अपराधियों की पहचान और पृष्ठभूमि पर ईमानदार चर्चा जरूरी है।

फ्रांस की घटना भी बनी बहस का विषय
इसी बीच यूरोप में आव्रजन, अपराध और सामाजिक तनाव को लेकर बहस तब और तेज हो गई जब फ्रांस के लियोन शहर की एक महिला का मामला चर्चा में आया। महिला ने आरोप लगाया कि उसके घर में घुसकर उसके साथ यौन हिंसा का प्रयास किया गया और उसके घर से सामान भी चोरी किया गया। बाद में स्थानीय मीडिया से बातचीत के दौरान महिला ने अपनी आपबीती साझा करते हुए अवैध आव्रजन और कानून-व्यवस्था को लेकर कड़े बयान दिए। इसके बाद उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हुई और मामला अदालत तक पहुंचा। यह प्रकरण यूरोप में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, आप्रवासन नीति और अपराध से जुड़ी सार्वजनिक बहस का हिस्सा बन गया।

वायरल वीडियो में पत्रकार के साथ बदसलूकी
ग्रूमिंग गैंग और सामाजिक तनाव को लेकर बहस के बीच एक महिला पत्रकार का वीडियो भी सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से वायरल हुआ। वीडियो में पत्रकार एक ऐसे इलाके से लाइव रिपोर्टिंग कर रही थीं जहां बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग रहते हैं।रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकार उस क्षेत्र को शांतिपूर्ण बताते हुए वहां के लोगों के बारे में सकारात्मक टिप्पणी कर रही थीं। इसी दौरान कुछ युवकों द्वारा कथित रूप से उन्हें अपशब्द कहे गए और वहां से चले जाने की चेतावनी दी गई। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और इसके बाद ब्रिटेन में सामाजिक ध्रुवीकरण, सामुदायिक संबंधों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर नई बहस छिड़ गई।

एलन मस्क समेत कई प्रभावशाली लोगों ने उठाए सवाल
ग्रूमिंग गैंग प्रकरण को लेकर हाल के महीनों में दुनिया की कई प्रमुख हस्तियों ने भी अपनी राय रखी है। ब्रिटेन के 'ग्रूमिंग गैंग' (यौन शोषण गिरोह) मामले में एलन मस्क ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और वहां के नेताओं पर तीखा हमला बोला है। मस्क ने मांग की है कि दशकों तक इस गंभीर अपराध की अनदेखी करने वाले राजनेताओं और अधिकारियों को लंबी जेल की सजा दी जानी चाहिए।

भारत के लिए भी चेतावनी
यह मामला केवल ब्रिटेन की समस्या नहीं माना जा सकता। भारत में भी महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ यौन अपराधों, मानव तस्करी और बाल शोषण की घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं। आए दिन सामने आने वाले दुष्कर्म और बाल यौन शोषण के मामले बताते हैं कि समाज, परिवार, पुलिस और न्याय व्यवस्था को और अधिक संवेदनशील तथा सक्रिय होने की आवश्यकता है। अपराधी किसी भी धर्म, जाति, नस्ल या समुदाय से क्यों न हो, पीड़ित की सुरक्षा और न्याय सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि शिकायतों को समय रहते गंभीरता से नहीं लिया जाता तो छोटे अपराध संगठित और भयावह रूप ले सकते हैं। लगातार बढ़ते दबाव और नए खुलासों के बाद ब्रिटिश सरकार ने स्वतंत्र राष्ट्रीय जांच शुरू करने का फैसला किया है। ब्रिटिश सरकार का कहना है कि पुराने मामलों की समीक्षा की जाएगी, पुलिस जांच को मजबूत किया जाएगा और पीड़ितों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है कि यदि वर्षों पहले शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई की जाती, तो क्या सैकड़ों मासूम बच्चों और किशोरियों को इस भयावह शोषण का शिकार बनने से बचाया जा सकता था?