बिहार पुलिस को मिले 162 नए जवान, दीक्षांत परेड में गूंजा अनुशासन का संदेश,आईजी बोले- अब अपराधियों से इंटरनेट की दुनिया में भी होगा लड़ना

Bihar Police gets 162 new recruits; the message of discipline resonates at the passing-out parade; IG states—criminals must now be fought in the world of the internet as well.

नालंदा। बिहार पुलिस को सोमवार को 162 नए प्रशिक्षित जवानों की सौगात मिली। नालंदा जिले के बिहार शरीफ स्थित दीपनगर पुलिस लाइन में आयोजित भव्य दीक्षांत परेड समारोह में जहानाबाद और अरवल जिले के 162 प्रशिक्षु पुलिस जवानों ने सफल प्रशिक्षण के बाद शानदार परेड का प्रदर्शन किया। समारोह के मुख्य अतिथि मगध प्रक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) जितेंद्र राणा ने सभी जवानों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई और उन्हें जनता की सेवा, अनुशासन तथा ईमानदारी के साथ कर्तव्य निभाने का संकल्प दिलाया। दीक्षांत समारोह में बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी, जवानों के परिजन और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। आकर्षक मार्चपास्ट और अनुशासित ड्रिल ने समारोह को गौरवपूर्ण बना दिया। परेड का निरीक्षण करने के बाद आईजी जितेंद्र राणा ने जवानों की शानदार प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा कि प्रशिक्षण की सफलता अब उनकी वास्तविक जिम्मेदारियों की शुरुआत है। अपने संबोधन में आईजी जितेंद्र राणा ने कहा कि पुलिस की वर्दी केवल एक पोशाक नहीं, बल्कि जनता के विश्वास, जिम्मेदारी और कानून के प्रति समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि वर्दी पहनने वाला प्रत्येक पुलिसकर्मी अपने आचरण, व्यवहार और कार्यशैली से पूरे पुलिस विभाग की छवि बनाता है। इसलिए वर्दी की गरिमा, अनुशासन और स्वच्छता से कभी समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज के दौर में पुलिसिंग की चुनौतियां पहले से कहीं अधिक जटिल हो गई हैं। अब अपराध केवल सड़कों और गलियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इंटरनेट, सोशल मीडिया और मोबाइल प्लेटफॉर्म के जरिए साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में हर पुलिसकर्मी को नई तकनीकों की जानकारी रखनी होगी और बदलते अपराधों के स्वरूप के अनुरूप स्वयं को लगातार अपडेट करना होगा। उन्होंने कहा कि प्रभावी पुलिसिंग के लिए तकनीकी दक्षता उतनी ही आवश्यक है, जितनी शारीरिक क्षमता और अनुशासन। आईजी ने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान जवानों को कानून-व्यवस्था, अपराध अनुसंधान, साइबर अपराध, अनुशासन, शारीरिक दक्षता और आधुनिक पुलिसिंग के विभिन्न पहलुओं का व्यापक प्रशिक्षण दिया गया है। लेकिन सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती। सेवा में आने के बाद भी प्रत्येक पुलिसकर्मी को लगातार सीखते रहना होगा और जिस क्षेत्र में उसकी तैनाती हो, वहां की परिस्थितियों को समझकर जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप कार्य करना होगा।

उन्होंने कहा कि पुलिस बल को कई बार अपराधियों के खिलाफ बल प्रयोग भी करना पड़ता है, लेकिन पुलिस की सबसे बड़ी पहचान उसकी निष्पक्षता, ईमानदारी और सेवा भावना होती है। फरियाद लेकर आने वाले प्रत्येक व्यक्ति के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना और कानून के अनुसार निष्पक्ष कार्रवाई करना ही एक आदर्श पुलिसकर्मी की पहचान है। उन्होंने जवानों से शारीरिक फिटनेस बनाए रखने, अनुशासन को जीवनभर अपनाने तथा अपने व्यवहार में विनम्रता और सत्यनिष्ठा बनाए रखने की अपील की। नालंदा के पुलिस अधीक्षक भारत सोनी ने बताया कि इन 162 प्रशिक्षु जवानों ने प्रशिक्षण अवधि के दौरान मलमास मेले की सुरक्षा व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण केंद्र में बिहार के विभिन्न जिलों के अलावा राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और झारखंड से आए जवानों को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान कानून-व्यवस्था संधारण, अपराध अनुसंधान, साइबर अपराध की रोकथाम, हथियार संचालन, फायरिंग, ड्रिल, मानवाधिकार, भीड़ नियंत्रण, आपदा प्रबंधन, यातायात प्रबंधन, सामुदायिक पुलिसिंग तथा व्यवहारिक पुलिसिंग जैसे विषयों का सैद्धांतिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। समारोह के दौरान उत्कृष्ट परेड प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षु जवानों, बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षु अधिकारियों तथा प्रशिक्षण कार्य में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पुलिस लाइन के डीएसपी सुमित सहित कई अधिकारियों और कर्मियों को आईजी जितेंद्र राणा ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। परेड की सलामी के साथ समारोह का समापन हुआ। दीक्षांत समारोह में शामिल प्रशिक्षु जवानों की खुशी भी देखते ही बन रही थी। कैमूर जिले के आबिद खान ने बताया कि बचपन से उनका सपना पुलिस में भर्ती होने का था और अब वह जहानाबाद जिले में अपनी सेवाएं देंगे। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान मिली सीख उनके पूरे करियर में काम आएगी। वहीं भोजपुर के किसान परिवार से आने वाले प्रशिक्षु नीतीश कुमार पासवान ने कहा कि उन्होंने कई असफलताओं के बावजूद हार नहीं मानी। वर्ष 2015 में दारोगा मुख्य परीक्षा में सफल नहीं हो सके थे, लेकिन लगातार मेहनत जारी रखी और आज पुलिस की वर्दी पहनने का सपना पूरा हुआ। उन्होंने कहा कि परिवार के सदस्य बीमारी के कारण समारोह में नहीं पहुंच सके, लेकिन उनकी सफलता पूरे परिवार के लिए गर्व का क्षण है। दीपनगर पुलिस लाइन में आयोजित यह दीक्षांत समारोह केवल प्रशिक्षण पूरा होने का अवसर नहीं था, बल्कि बिहार पुलिस को ऐसे 162 नए जवान मिलने का भी प्रतीक था, जो आधुनिक तकनीक, अनुशासन, सेवा भावना और ईमानदारी के साथ कानून-व्यवस्था को मजबूत करने तथा जनता का विश्वास कायम रखने की जिम्मेदारी निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।