बड़ी खबरः राघव चड्ढा को केंद्र सरकार ने दी जेड सिक्योरिटी! दिल्ली-पंजाब में Z सुरक्षा और अन्य जगहों पर Y+ कवर, थ्रेट रिपोर्ट के आधार पर गृह मंत्रालय का बड़ा फैसला
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता राघव चड्ढा को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा उनकी सुरक्षा वापस लिए जाने के तुरंत बाद केंद्र सरकार ने उन्हें उच्च श्रेणी का Z सुरक्षा कवर प्रदान कर दिया है। यह फैसला इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की थ्रेट परसेप्शन रिपोर्ट के आधार पर गृह मंत्रालय द्वारा लिया गया बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, राघव चड्ढा को दिल्ली और पंजाब में Z श्रेणी की सुरक्षा मिलेगी, जबकि देश के अन्य हिस्सों में उन्हें Y+ सुरक्षा कवर दिया जाएगा। Z सुरक्षा देश के सबसे उच्च सुरक्षा कवचों में से एक है, जिसमें करीब 22 सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। इस सुरक्षा घेरे में 4 से 6 NSG कमांडो के साथ-साथ CRPF, ITBP और स्थानीय पुलिस बल भी शामिल होते हैं। हाल ही में आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया था। उनकी जगह अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंपी गई। इतना ही नहीं, चड्ढा के सदन में बोलने पर भी रोक लगाए जाने की खबरें सामने आईं, जिससे पार्टी के भीतर मतभेदों की अटकलें तेज हो गईं। इसी बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा अशोक मित्तल के जालंधर स्थित आवास और उनकी निजी यूनिवर्सिटी में छापेमारी ने इस पूरे घटनाक्रम को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। पार्टी के फैसलों के बाद राघव चड्ढा ने खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “मुझे खामोश किया जा सकता है, लेकिन हराया नहीं जा सकता।” हाल के दिनों में उन्होंने कई वीडियो जारी कर पार्टी की ओर से लगाए गए आरोपों का जवाब भी दिया है।
टॉप लीडरशिप से क्यों बढ़ी नाराजगी?
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह जैसे वरिष्ठ नेताओं के कानूनी मामलों के दौरान राघव चड्ढा की चुप्पी पार्टी नेतृत्व को अखर गई थी। उस समय चड्ढा विदेश में आंखों के इलाज के लिए गए हुए थे, लेकिन वापसी के बाद भी उन्होंने कोई सक्रिय राजनीतिक भूमिका नहीं निभाई। पार्टी सूत्रों का मानना है कि राज्यसभा में उपनेता पद से हटाया जाना और उसके बाद सुरक्षा वापसी—दोनों फैसले इसी नाराजगी का परिणाम हैं। इधर राघव चड्ढा को केंद्र द्वारा दी गई Z सुरक्षा को लेकर राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं हैं। इसे एक ओर जहां सुरक्षा से जुड़ा सामान्य प्रशासनिक निर्णय बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसके राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं।