Big News: राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल उल्लंघन का मामला! गृह मंत्रालय ने बंगाल सरकार से मांगी रिपोर्ट, गरमाई सियासत

Big News: Presidential protocol violation case! Home Ministry seeks report from Bengal government, politics heats up

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे के दौरान प्रोटोकॉल उल्लंघन और कार्यक्रम स्थल में अचानक बदलाव को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस मामले को लेकर जहां सियासत गरमाई हुई है, वहीं अब गृह मंत्रालय ने सख्त रूख अख्तियार करते हुए बंगाल सरकार से पूरी रिपोर्ट मांगी है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस पूरे मामले का बड़े स्तर पर संज्ञान लिया है। केंद्रीय गृह सचिव ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर शाम पांच बजे तक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें प्रोटोकॉल न दिए जाने, रास्ते की सही जानकारी न प्रदान करने और अन्य व्यवस्थाओं में चूक के बारे में स्पष्टीकरण मांगा गया है। दरअसल ये विवाद राष्ट्रपति मुर्मू के उत्तर बंगाल दौरे के दौरान सामने आया, जहां वह दार्जिलिंग जिले में 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं थीं। मूल रूप से कार्यक्रम बिधाननगर (फांसीदेवा ब्लॉक) में प्रस्तावित था, जहां बड़ी संख्या में संथाल आदिवासी समुदाय के लोग पहुंच सकते थे। लेकिन राज्य प्रशासन ने सुरक्षा, भीड़भाड़ और अन्य कारणों का हवाला देकर इसे बागडोगरा एयरपोर्ट के पास गोशाईपुर (या गोसाईंपुर) में स्थानांतरित कर दिया। राष्ट्रपति ने खुद इस बदलाव पर नाराजगी जताई और कहा कि नया स्थान छोटा था, जिससे कई लोग पहुंच नहीं पाए। उन्होंने ममता बनर्जी को छोटी बहन बताते हुए पूछा कि क्या वो उनसे नाराज हैं, क्योंकि न तो मुख्यमंत्री और न ही कोई मंत्री उन्हें रिसीव करने पहुंचीं, जबकि पद की गरिमा के लिए प्रोटोकॉल का पालन जरूरी है। 

इन प्रोटोकॉल्स का हुआ उल्लंघन
सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल में कई पैमानों पर सुरक्षा संबंधित ब्लू बुक के नियमों का उल्लंघन हुआ है। जिसमें प्रेसिडेंट को रिसीव करने और सी-ऑफ करने के लिए सीएम, सीएस और डीजीपी क्यों नहीं थे? सिर्फ सिलीगुड़ी के मेयर ही उन्हें रिसीव करने के लिए वहां थे। प्रेसिडेंट के लिए बने वॉशरूम में भी पानी नहीं था। एडमिनिस्ट्रेशन जिस रास्ते से गुज़रा, वह कचरे से भरा हुआ था। सूत्रों का ये भी कहना है कि इस परिस्थितियों के लिए दार्जिलिंग के डीएम, सिलीगुड़ी के सीपी और एडीएम जिम्मेदार हैं।