सुर्खियों में बाबा जी का बयान: घपले ठीक कर लो, ऐसा ना हो मुझे दोबारा आंदोलन करना पड़े! बाबा रामदेव बोले- देश में बहुत घपला... बेची जा रही नौकरियां
हरिद्वार। दिल्ली के जंतर-मंतर और रांची में चल रहे छात्र आंदोलनों के बीच अब स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे भी अपनी मूलभूत सुविधाओं को लेकर आवाज उठाने लगे हैं। कई जगह विद्यार्थी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, बिजली-पानी की व्यवस्था, शौचालय और किताबों जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर अधिकारियों के कार्यालय तक पहुंच रहे हैं। इस बदलते माहौल पर योगगुरु बाबा रामदेव ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने नई पीढ़ी, खासकर जेनजी और जेन अल्फा के बच्चों के आंदोलनों को जायज मुद्दों से जुड़ा बताते हुए व्यवस्था को सुधारने की जरूरत पर जोर दिया है।
सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में बाबा रामदेव देश में बढ़ते आंदोलनों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों पर अपनी बात रखते नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में छोटे-छोटे बच्चे स्कूलों से निकलकर यह सवाल पूछ रहे हैं कि उनके स्कूल में शिक्षक क्यों नहीं हैं, बिजली-पानी की सुविधा क्यों नहीं है और शौचालय जैसी बुनियादी व्यवस्था क्यों उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि कहीं शिक्षक हैं तो किताबें नहीं हैं और जहां किताबें हैं, वहां परीक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। बाबा रामदेव ने परीक्षा और उच्च शिक्षा की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं का जिक्र करते हुए कहा कि विद्यार्थी मेहनत करके दसवीं और बारहवीं की परीक्षा पास करते हैं, लेकिन आगे विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए उन्हें फिर अलग-अलग प्रवेश परीक्षाओं की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। उनके मुताबिक, इससे विद्यार्थियों के सामने शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और समान अवसर का सवाल खड़ा होता है।
योगगुरु ने सरकारी भर्तियों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि नौकरी की प्रक्रिया में खासकर इंटरव्यू के दौरान पक्षपात और भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आती हैं। उनका आरोप है कि कई बार योग्यता के बजाय विचार, संगठन या जातीय आधार पर लोगों को प्राथमिकता देने की कोशिश होती है और बाकी अभ्यर्थियों को पीछे कर दिया जाता है। उन्होंने इसे लोकतंत्र और न्याय दोनों के खिलाफ बताया। बाबा रामदेव ने सरकारी नौकरियों में कथित बड़े पैमाने पर पैसे के लेन-देन का भी आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि कुछ जगहों पर 50 लाख रुपये से लेकर एक करोड़ रुपये तक लेकर भर्ती किए जाने का खेल चल रहा है। हालांकि, उनके इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बाबा रामदेव ने स्पष्ट किया कि वह आंदोलन के नाम पर अराजकता का समर्थन नहीं करते। लेकिन उनका कहना था कि यदि व्यवस्था में लगातार गड़बड़ियां बनी रहेंगी तो युवाओं और विद्यार्थियों में असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है। उन्होंने सरकार और व्यवस्था से समय रहते सुधार करने की अपील करते हुए चेतावनी दी कि आने वाले समय में ऐसे आंदोलन और बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि देश के बच्चों को अपने अधिकारों और सुविधाओं के लिए सड़कों पर उतरना पड़े तो यह व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने जिम्मेदार लोगों को सचेत करते हुए कहा कि ‘घपले ठीक कर लो, कहीं ऐसा न हो कि बाबा रामदेव को दोबारा आंदोलन करना पड़े।’