विकसित भारत-2047' के विजन पर सेना का फोकस: 'सोनितपुर संवाद' से सैन्य-नागरिक समन्वय को मिली नई मजबूती

Army Focuses on 'Viksit Bharat-2047' Vision: 'Sonitpur Samvad' Lends New Strength to Civil-Military Coordination

देश को वर्ष 2047 तक पूर्ण विकसित बनाने के राष्ट्रीय संकल्प को पूरा करने में भारतीय सेना ने एक बड़ी और अनुकरणीय पहल की है। असम के तेजपुर में भारतीय सेना की प्रतिष्ठित गजराज कोर द्वारा ‘सोनितपुर संवाद’ नामक एक बेहद महत्वपूर्ण सैन्य-नागरिक समन्वय संगोष्ठी (सिम्पोजियम) का आयोजन किया गया। 'सामूहिक प्रयास से राष्ट्र निर्माण' और 'राष्ट्र सर्वोपरि' के मूल मंत्र के साथ आयोजित इस विशेष कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सेना, स्थानीय प्रशासन और नागरिक संस्थाओं के बीच आपसी तालमेल तथा रणनीतिक सहयोग को एक नए शिखर पर ले जाना है।

अमृतकाल के विजन को ध्यान में रखते हुए इस ‘संवाद’ पहल के तहत आपसी समन्वय, आत्मनिर्भरता, मानसिक दृढ़ता, आपसी विश्वास और समग्र क्षेत्रीय विकास को प्रमुख लक्ष्यों के रूप में रेखांकित किया गया। इस उच्च स्तरीय संगोष्ठी में पूर्वोत्तर भारत के सुरक्षा तंत्र, राज्य प्रशासन, प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ नीति-निर्माताओं तथा अधिकारियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में तेजपुर विश्वविद्यालय के कुलपति, सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के महानिरीक्षक, सोनितपुर रेंज के आईजीपी, वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) के साथ-साथ बार काउंसिल और स्थानीय नगर निकाय के जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इसके अलावा निजी अस्पतालों के प्रबंधन अधिकारी, मंगलदोई कौशल विकास केंद्र के प्राचार्य तथा तेजपुर और मिसामारी के अतिरिक्त उपायुक्तों सहित कई प्रमुख हस्तियों ने अपनी उपस्थिति से इस संवाद को वैश्विक व क्षेत्रीय विकास के मंच में बदल दिया। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए गजराज कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) ने 'विकसित भारत-2047' के सपने को साकार करने के लिए एक नया त्रिसूत्रीय मंत्र दिया। उन्होंने 'JAI' यानि जॉइंटनेस (सामूहिकता), आत्मनिर्भरता और इनोवेशन (नवाचार) को भविष्य का मार्गदर्शक सिद्धांत बताया। जीओसी ने जोर देकर कहा कि यदि हमें एक सुरक्षित, सक्षम और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार भारत का निर्माण करना है, तो मजबूत संस्थागत सहयोग, समन्वित जमीनी कार्रवाई और तय समयसीमा के भीतर लक्ष्यों को पूरा करना अनिवार्य होगा। इस संगोष्ठी का सबसे बड़ा और व्यावहारिक परिणाम एक ऐतिहासिक समझौते के रूप में सामने आया। नागरिक-सैन्य सहयोग को केवल कागजों से निकालकर धरातल पर लाने के उद्देश्य से देश के प्रतिष्ठित 'लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई क्षेत्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान' (LGBRIMH) और गजराज कोर के अंतर्गत आने वाले सैन्य अस्पतालों के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस एमओयू के तहत दोनों ही चिकित्सा प्रणालियां मिलकर मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुदृढ़ और आधुनिक बनाएंगी। इसके अंतर्गत सैन्य और नागरिक डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ को एडवांस ट्रेनिंग दी जाएगी। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समकालीन चुनौतियों पर दोनों संस्थान मिलकर संयुक्त शोध कार्य करेंगे। समाज के हर वर्ग और सुदूर क्षेत्रों में तैनात जवानों के बीच मानसिक दृढ़ता बढ़ाने के लिए संयुक्त रूप से जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने कार्यक्रम के समापन पर कहा कि 'सोनितपुर संवाद' केवल एक दिन की चर्चा नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर में क्षेत्रीय विकास, मजबूत संस्थागत साझेदारी और सामूहिक राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा। इसके जरिए न केवल सुरक्षा और प्रशासनिक मोर्चे पर सामंजस्य बढ़ेगा, बल्कि पहली बार मानसिक स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषय पर सेना और नागरिक समाज मिलकर एक नई मिसाल पेश करेंगे। इस अनूठे संवाद की हर तरफ सराहना हो रही है, जिसे भविष्य में देश के अन्य हिस्सों के लिए भी रोल मॉडल माना जा रहा है।