मदरसों के बाद अब उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में मिड डे मील में घोटाले की आशंका! प्रदेश के 5 जिलों में होगी जांच
हरिद्वार जिले के मदरसों में 12 हजार से अधिक बच्चों के फर्जी नामांकन का सनसनीखेज खुलासा होने के बाद उत्तराखंड के शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। इस फर्जीवाड़े से सबक लेते हुए प्रदेश सरकार ने अब राज्य के पांच प्रमुख जिलों के सरकारी स्कूलों में भी 'मिड डे मील' की व्यापक जांच कराने का फैसला किया है। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने शिक्षा महानिदेशालय और सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं। इस जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि स्कूलों के रजिस्टरों में दर्ज छात्र संख्या और वास्तव में मिड डे मील खाने वाले बच्चों की जमीनी हकीकत में कितना अंतर है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पिछले दिनों शासन के निर्देश पर हरिद्वार जिला प्रशासन ने एक साथ कई मदरसों का औचक निरीक्षण और दस्तावेजों की पड़ताल की थी। इस जांच की रिपोर्ट बेहद चौंकाने वाली रही है। मदरसों के कागजों और अभिलेखों में बच्चों की कुल संख्या 31,780 दर्ज थी। महज एक महीने बाद जब भौतिक सत्यापन किया गया, तो यह संख्या घटकर सिर्फ 19,491 रह गई। जांच में सीधे तौर पर 12,289 बच्चों का नामांकन पूरी तरह फर्जी पाया गया। हैरान करने वाली बात यह है कि ये फर्जी बच्चे सिर्फ कागजों पर चल रहे थे, लेकिन इनके नाम पर सरकार से अल्पसंख्यक कल्याण की योजनाओं का लाभ और मिड डे मील का राशन-पैसा नियमित रूप से उठाया जा रहा था। मदरसों के इस खेल के सामने आने के बाद अब ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार और देहरादून के मैदानी क्षेत्रों के सभी सरकारी और अशासकीय स्कूलों को रडार पर ले लिया गया है। इसके अलावा पौड़ी जिले के कोटद्वार और नैनीताल जिले के हल्द्वानी व रामनगर क्षेत्रों में भी छात्र संख्या और मिड डे मील की सघन जांच होगी। महानिदेशालय, पीएम पोषण कार्यालय और संबंधित जिलों के सीईओ संयुक्त रूप से इस अभियान को चलाएंगे। अल्पसंख्यक कल्याण के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने साफ कर दिया है कि अन्य जिलों के मदरसों की भी जांच तेजी से चल रही है। हरिद्वार के जिन भी मदरसों में बच्चों की वास्तविक संख्या और मिड डे मील के उपभोग में असमानता या हेरफेर मिली है, उनसे सरकारी धनराशि की शत-प्रतिशत वसूली की जाएगी और कानूनी कार्रवाई होगी।गौरतलब है कि प्रदेश के कक्षा 1 से 8वीं तक के लाखों बच्चों को इस योजना के तहत पका हुआ भोजन दिया जाता है। वर्ष 2025-26 के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्राथमिक स्तर पर 3,15,579 और उच्च प्राथमिक स्तर पर 2,41,620 छात्र-छात्राएं इस योजना से लाभान्वित हुए हैं। अब देखना होगा कि इस नई जांच में सरकारी स्कूलों का क्या सच सामने आता है। मामले में उत्तराखंड शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल सती ने कहा कि हरिद्वार के मामले को देखते हुए चिन्हित जिलों में स्कूलों के साथ-साथ मदरसों की भी गहन जांच होगी। इस जांच में मुख्य रूप से रोजाना दिए जाने वाले मिड डे मील के कोटे और स्कूल में उपस्थित रहने वाले वास्तविक छात्रों की संख्या का मिलान किया जाएगा।