रांची में मिनी पुरी का अहसास: 16 जुलाई से शुरू होगा ऐतिहासिक जगन्नाथपुर रथ यात्रा महोत्सव, तैयारियां अंतिम चरण में
रांची। झारखंड की राजधानी रांची के धुर्वा स्थित ऐतिहासिक और पौराणिक भगवान जगन्नाथपुर मंदिर में वार्षिक रथ यात्रा महोत्सव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। आगामी 16 जुलाई से शुरू होने वाले इस भव्य और विश्वप्रसिद्ध धार्मिक आयोजन को लेकर मंदिर परिसर से लेकर विशाल मेला क्षेत्र तक में तैयारियां युद्धस्तर पर चल रही हैं। वर्षों पुरानी इस अनूठी परंपरा को जीवंत रखने और देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की आस्था को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन और मंदिर आयोजन समिति दिन-रात तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी है। इस बार का महोत्सव धार्मिक भव्यता के साथ-साथ कई मायनों में आधुनिक और सुव्यवस्थित होने जा रहा है। रथ यात्रा का मुख्य आकर्षण भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा का विशाल रथ होता है। इस वर्ष भी महाप्रभु के रथ की मरम्मत, सुदृढ़ीकरण और साज-सज्जा का कार्य बेहद बारीकी से किया जा रहा है। रथ को उसके मूल पारंपरिक और धार्मिक स्वरूप में ही निखारा जा रहा है ताकि सदियों पुरानी सांस्कृतिक गरिमा बरकरार रहे। इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए ओडिशा और पश्चिम बंगाल से आए विशेष और अनुभवी कारीगरों तथा मैकेनिकों की टीम चौबीसों घंटे काम कर रही है। रथ के पहियों से लेकर ऊपरी गुंबद तक की सुरक्षा जांच कड़ाई से की जा रही है।
धुर्वा की जगन्नाथपुर रथ यात्रा के साथ लगने वाला ऐतिहासिक मेला पूरे पूर्वी भारत में अपनी एक अलग पहचान रखता है। इस वर्ष मेले के आयोजन को लेकर राजस्व में बड़ा उछाल देखने को मिला है। इस बार जगन्नाथपुर रथ यात्रा मेले का ठेका रिकॉर्ड 2.27 करोड़ रुपये में आवंटित किया गया है, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है। ठेका राशि में हुई इस भारी बढ़ोतरी के कारण इस बार मेले में लगने वाले विभिन्न प्रकार के स्टॉलों, दुकानों, खान-पान के काउंटरों और बच्चों के मनोरंजन के लिए लगने वाले बड़े झूलों के किराये में बढ़ोतरी होने की पूरी संभावना है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि किराये में इस वृद्धि का सीधा असर यहां आने वाले छोटे-बड़े कारोबारियों के मुनाफे और मेले का आनंद लेने वाले आम श्रद्धालुओं व पर्यटकों की जेब पर भी पड़ सकता है। लाखों की भारी भीड़ को नियंत्रित करने और मेले को पूरी तरह सुरक्षित व सुगम बनाने के लिए इस बार प्रशासन ने एक विशेष रणनीति तैयार की है। मेले के संपूर्ण संचालन और सुरक्षा की कमान 'वजन सिक्योरिटी एंड फैसिलिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड' नामक एक प्रतिष्ठित निजी एजेंसी को सौंपी गई है। यह एजेंसी न केवल पूरे मेला क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था (सीसीटीवी और सुरक्षा गार्डों की तैनाती) सुनिश्चित करेगी, बल्कि दुकानदारों को स्टॉल आवंटन, निर्बाध बिजली आपूर्ति, चौबीसों घंटे स्वच्छता और पीने के साफ पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का प्रबंधन भी करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य मेले में आने वाले बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को किसी भी तरह की अव्यवस्था या परेशानी से बचाना है। जगन्नाथपुर की यह रथ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि झारखंड की साझी संस्कृति का प्रतीक है, जहां नौ दिनों तक पूरा क्षेत्र उत्सव के रंग में डूब जाता है। जिला प्रशासन ट्रैफिक रूट डायवर्जन, आकस्मिक चिकित्सा शिविर और पार्किंग स्थलों को चिह्नित करने में लगा है। आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष का मुख्य प्रयास धार्मिक आस्था और पारंपरिक रीति-रिवाजों की पवित्रता को बनाए रखते हुए आधुनिक सुख-सुविधाओं का बेहतर तालमेल बिठाना है, ताकि 16 जुलाई से शुरू होने वाला यह महामहोत्सव पूरी तरह से सुरक्षित, सुव्यवस्थित और ऐतिहासिक रूप से भव्य साबित हो सके।