महाराष्ट्र में धर्मांतरण पर नया कानून लागू,60 दिन पहले देनी होगी सूचना!जबरन धर्म परिवर्तन पर 10 साल तक सजा,अवैध धर्मांतरण से जन्मे बच्चे का धर्म मां वाला माना जाएगा
मुंबई। महाराष्ट्र में धर्मांतरण को लेकर नया कानून लागू हो गया है। महाराष्ट्र फ्रीडम ऑफ रिलिजन एक्ट, 2026 के तहत अब किसी व्यक्ति का जबरन, दबाव, धोखे, गलत बयानी, प्रलोभन, अनुचित प्रभाव या विवाह के बहाने धर्म परिवर्तन कराना अपराध होगा। कानून में स्वेच्छा से धर्म बदलने वाले व्यक्ति के लिए भी एक निर्धारित प्रक्रिया तय की गई है। इसके तहत प्रस्तावित धर्मांतरण से कम से कम 60 दिन पहले सक्षम प्राधिकारी को सूचना देना अनिवार्य होगा।
इस कानून को यूसीसी यानी समान नागरिक संहिता समझना सही नहीं है। यह महाराष्ट्र का धर्म की स्वतंत्रता और अवैध धर्मांतरण पर रोक से संबंधित कानून है, जो अलग-अलग धर्मों के बीच होने वाले अवैध धर्मांतरण पर लागू होगा।
कानून के अनुसार, जो व्यक्ति अपनी इच्छा से एक धर्म से दूसरे धर्म में जाना चाहता है, उसे प्रस्तावित धर्मांतरण से 60 दिन पहले सक्षम प्राधिकारी को निर्धारित प्रारूप में नोटिस देना होगा। धर्मांतरण की सूचना के बाद सक्षम प्राधिकारी अपने कार्यालय तथा संबंधित स्थानीय निकाय के कार्यालय में इसकी जानकारी सार्वजनिक करेगा और 30 दिन के भीतर आपत्तियां मांगी जा सकेंगी। जरूरत पड़ने पर प्रस्तावित धर्मांतरण की मंशा, उद्देश्य और कारण की पुलिस के माध्यम से जांच भी कराई जा सकती है।
धर्मांतरण के बाद भी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति और धर्मांतरण का आयोजन करने वाले व्यक्ति या संस्था को धर्मांतरण की तारीख से 21 दिन के भीतर सक्षम प्राधिकारी के समक्ष घोषणा देनी होगी। इस घोषणा में व्यक्ति का मूल धर्म और नया धर्म समेत कई विवरण दर्ज किए जाएंगे।
कानून का सबसे अहम और चर्चा में रहने वाला प्रावधान उन बच्चों से जुड़ा है, जो अवैध धर्मांतरण के कारण हुए विवाह या विवाह जैसे संबंध से पैदा होते हैं। कानून में स्पष्ट किया गया है कि ऐसे बच्चे को उस विवाह या संबंध से पहले मां के धर्म का माना जाएगा। यानी कानून में इस स्थिति में बच्चे के धर्म को मां के पूर्व-विवाह धर्म से जोड़ा गया है। ऐसे बच्चे को मां और पिता दोनों की संपत्ति में लागू उत्तराधिकार कानूनों के अनुसार अधिकार मिलेगा तथा भरण-पोषण का भी अधिकार होगा। बच्चे की अभिरक्षा मां के पास रहेगी, जब तक कोर्ट इसके विपरीत कोई आदेश न दे।
कानून में धर्मांतरण के उद्देश्य से किए गए विवाह को लेकर भी प्रावधान है। यदि किसी विवाह का एकमात्र उद्देश्य अवैध धर्मांतरण कराना पाया जाता है, तो संबंधित पक्ष की याचिका पर कोर्ट उस विवाह को शून्य घोषित कर सकता है।
जबरन या अवैध धर्मांतरण के मामलों में सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। कानून के तहत अपराध की प्रकृति के अनुसार जेल और जुर्माने की सजा हो सकती है। विवाह के नाम पर अवैध धर्मांतरण, नाबालिग, महिला, मानसिक रूप से असमर्थ व्यक्ति अथवा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से जुड़े मामलों में भी कड़े दंड का प्रावधान है। दोबारा अपराध करने पर सजा और बढ़ सकती है।
कानून में शिकायत की व्यवस्था भी व्यापक रखी गई है। कथित अवैध धर्मांतरण से प्रभावित व्यक्ति के अलावा उसके माता-पिता, भाई-बहन तथा कानून में निर्धारित अन्य रिश्तेदार भी शिकायत कर सकते हैं। वहीं, धर्मांतरण को स्वैच्छिक और कानून के अनुरूप साबित करने की जिम्मेदारी भी संबंधित मामलों में धर्मांतरण कराने वाले व्यक्ति पर डाली गई है।
सरकार का तर्क है कि कानून का उद्देश्य जबरन, धोखे, प्रलोभन या दबाव के जरिए होने वाले धर्मांतरण को रोकना और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करना है। दूसरी ओर, इसके आलोचक 60 दिन की पूर्व सूचना, आपत्तियों की व्यवस्था और जांच के प्रावधानों को लेकर व्यक्तिगत स्वतंत्रता तथा निजी फैसलों में सरकारी दखल की आशंका जता रहे हैं।
इस तरह महाराष्ट्र के नए कानून में केवल जबरन धर्मांतरण पर रोक लगाने की व्यवस्था ही नहीं है, बल्कि स्वैच्छिक धर्म परिवर्तन के लिए भी पहले से सूचना देने और बाद में घोषणा करने की प्रक्रिया तय की गई है। वहीं अवैध धर्मांतरण से जुड़े विवाह या संबंध से पैदा होने वाले बच्चे के मामले में कानून ने स्पष्ट रूप से कहा है कि बच्चे को मां के उस धर्म का माना जाएगा, जो उसका विवाह या संबंध से पहले था।