हक,हुकूक और वजूद की लड़ाई: रुद्रपुर की सड़कों पर गर्जेगा बंगाली समाज, 20 सितंबर को महारैली
रुद्रपुर। दशकों से उपेक्षा का दंश झेल रहे उत्तराखंड के बंगाली समाज ने अब अपने अधिकारों की प्राप्ति के लिए आर-पार के संघर्ष का बिगुल फूंक दिया है। अपनी चार सूत्रीय ज्वलंत मांगों को लेकर बंगाली कल्याण समिति उत्तराखंड के तत्वावधान में आगामी 20 सितंबर 2026 (रविवार) को ऊधम सिंह नगर (रुद्रपुर) में एक ऐतिहासिक महा रैली और प्रदर्शन आयोजित होने जा रहा है।
जनपद ऊधम सिंह नगर में बंगाली समाज ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। बंगाली कल्याण समिति उत्तराखंड के आह्वान पर 20 सितंबर 2026 को रुद्रपुर में विशाल महारैली निकाली जाएगी। रामलीला मैदान से शुरू होने वाली यह रैली जिला कलेक्ट्रेट स्थित डीएम कार्यालय तक पहुंचेगी। समिति ने इसे समाज के अधिकारों और लंबित मांगों के समाधान की दिशा में निर्णायक आंदोलन बताते हुए बड़ी संख्या में युवाओं और समाज के लोगों से शामिल होने की अपील की है। बंगाली समाज की ओर से अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर चलाया जा रहा 10 दिवसीय धरना-प्रदर्शन गुरुवार को आठवें दिन भी जारी रहा। धरना स्थल पर वक्ताओं ने सरकार से लंबे समय से लंबित मांगों पर ठोस निर्णय लेने की अपील की। समिति पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि मांगों का जल्द समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से और व्यापक किया जाएगा। वही इस दौरान समिति के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप अधिकारी ने कहा कि बंगाली समाज लंबे समय से अपनी मांगों के समाधान की प्रतीक्षा कर रहा है। सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन शुरू किया गया है। उन्होंने कहा कि समाज की प्रमुख मांगों में विस्थापित बंगाली समाज की संबंधित जातियों को उत्तराखंड में अनुसूचित जाति का अधिकार और आरक्षण दिलाना शामिल है।
समिति की दूसरी प्रमुख मांग प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक बांग्ला भाषा में शिक्षा की व्यवस्था करने की है। बंगाली समाज का कहना है कि भाषा और शिक्षा से जुड़ी यह मांग विद्यार्थियों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से सीधे जुड़ी हुई है। इसके अलावा शक्तिफार्म सहित अन्य पुनर्वासित क्षेत्रों में लंबे समय से लंबित भूमिधरी अधिकार प्रदान करने की मांग भी उठाई जा रही है। चौथी मांग करीब आठ वर्षों से बंद छात्रवृत्ति और सहायता योजनाओं को दोबारा शुरू करने की है। समिति का कहना है कि इन योजनाओं के बंद होने से विद्यार्थियों और जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक सहायता से वंचित होना पड़ रहा है। धरना स्थल पर वक्ताओं ने कहा कि आंदोलन केवल किसी एक वर्ग या समूह तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध विद्यार्थियों, किसानों, विस्थापित परिवारों और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों से है। उन्होंने सरकार से चारों मांगों पर गंभीरता से विचार कर सकारात्मक पहल करने की मांग की। समाज के पदाधिकारियों का आरोप है कि लंबे समय से मांगें उठाने के बावजूद अपेक्षित समाधान नहीं हुआ। उनका यह भी आरोप है कि राजनीतिक दल चुनाव के दौरान समाज की समस्याओं को मुद्दा बनाते हैं, लेकिन बाद में मांगों के समाधान की दिशा में पर्याप्त पहल नहीं होती। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित राजनीतिक दलों या सरकार का पक्ष इस जानकारी में उपलब्ध नहीं है। अब सभी की निगाहें 20 सितंबर की महारैली पर हैं। रामलीला मैदान से कलेक्ट्रेट तक प्रस्तावित कूच के जरिए बंगाली समाज सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने की तैयारी में है। समिति ने स्पष्ट किया है कि मांगों पर ठोस पहल नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को आगे भी जारी रखा जाएगा। वही महारैली को सफल बनाने के लिए समिति द्वारा गांव-गांव जाकर संपर्क साधा जा रहा है और विशेष रूप से युवाओं से बड़ी संख्या में इस आंदोलन का हिस्सा बनने की अपील की जा रही है। आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि यदि 20 सितंबर की महारैली के बाद भी सरकार ने सकारात्मक रुख नहीं अपनाया, तो इस आंदोलन को उग्र और चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में फैलाया जाएगा। 20 सितंबर का यह महासंग्राम ऊधम सिंह नगर के इतिहास में बंगाली समुदाय के अधिकारों की एक नई इबारत लिखने को तैयार है।