झारखंड में भर्तियों में गड़बड़ी के खिलाफ 'युवा आक्रोश': 11 दिन से मैदान में डटे हज़ारों छात्र, सीआईडी ने दबोचे 3 दलाल,10 अगस्त को विधानसभा घेराव की चेतावनी
रांची। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में युवाओं के विरोध-प्रदर्शन की गूंज के बाद अब झारखंड में भी सरकारी नौकरियों में गड़बड़ी, घूसखोरी और पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा है। झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की विवादित भर्तियों के विरोध में राजधानी रांची के ऐतिहासिक जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में हजारों छात्र-छात्राएं पिछले 11 दिनों से लगातार धरने पर डटे हुए हैं।
झारखंड में सरकारी नौकरियों में कथित भर्ती घोटालों और पेपर लीक के आरोपों को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में हजारों छात्र-छात्राएं पिछले 11 दिनों से धरने पर डटे हुए हैं। आंदोलन अब केवल किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पिछले चार से पांच वर्षों में हुई दस से अधिक विवादित भर्तियों की निष्पक्ष जांच और पूरी भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर जनआंदोलन का रूप ले चुका है। छात्रों का आरोप है कि झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की कई भर्ती परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं। उनका कहना है कि सरकारी नौकरियां दिलाने वाला एक संगठित गिरोह सक्रिय है, जो अभ्यर्थियों से लाखों रुपये लेकर नियुक्तियां कराने का दावा करता है। आंदोलनकारियों के मुताबिक, कुछ मामलों में नौकरी दिलाने की कथित कीमत 25 लाख रुपये से लेकर डेढ़ करोड़ रुपये तक पहुंच गई। आंदोलन का नेतृत्व कर रही अर्चना कुमारी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दस से अधिक भर्ती परीक्षाओं में गंभीर गड़बड़ियों के आरोप सामने आए हैं। इसलिए छात्र किसी एक परीक्षा को रद्द कराने के बजाय सभी विवादित भर्तियों की जांच दूसरे राज्य के हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के पैनल से कराने की मांग कर रहे हैं। साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार की भी मांग की जा रही है। छात्रों ने कई मामलों का हवाला देते हुए सरकार पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा का 120 प्रश्नों वाला पूरा प्रश्नपत्र पहले ही चुनिंदा लोगों तक पहुंचा दिया गया था और उत्तर रटवाए गए। आंदोलनकारियों का दावा है कि जांच में इसकी पुष्टि होने के बावजूद सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया। इसी तरह लेडी सुपरवाइजर भर्ती में फर्जी डिग्रियों के आधार पर नियुक्तियों का मामला भी विवादों में रहा। जांच के दौरान 33 चयनित महिलाओं की स्नातक डिग्रियां एक ही निजी विश्वविद्यालय से होने का मामला सामने आया, जिसके बाद नियुक्तियों पर रोक लगानी पड़ी। वहीं उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा से पहले रांची पुलिस ने कथित सॉल्वर गैंग के मास्टरमाइंड सहित 164 अभ्यर्थियों को हिरासत में लिया था। आरोप है कि अभ्यर्थियों से 10 से 15 लाख रुपये लेकर उन्हें प्रश्नपत्र के उत्तर याद कराए जा रहे थे। धरना स्थल पर छात्र पारंपरिक लोकगीतों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से विरोध दर्ज करा रहे हैं। आंदोलन की एक खास तस्वीर यह भी है कि प्रदर्शनकारी झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन की तस्वीर लेकर बैठे हैं। छात्रों का कहना है कि शिबू सोरेन ने युवाओं के अधिकार और न्यायपूर्ण व्यवस्था का सपना देखा था, उसी सपने को बचाने के लिए वे संघर्ष कर रहे हैं। आंदोलन को और तेज करने की तैयारी भी शुरू हो गई है। छात्र संगठनों ने 6 अगस्त और 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा के घेराव का एलान किया है। इसे लेकर प्रशासन भी सतर्क हो गया है। उधर, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भर्ती घोटालों की जांच दूसरे राज्य के हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों से कराने की मांग पर कहा कि जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी तथ्य सामने आने के बाद उचित निर्णय लिया जाएगा। इसी बीच बहुचर्चित मेधा घोटाले में अपराध अनुसंधान विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन कथित दलालों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, ये एजेंट अभ्यर्थियों से पैसे लेकर परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी तक पहुंच बनाने का काम करते थे। सीआईडी अब पूरे नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन और कथित भर्ती रैकेट की गहन जांच में जुटी है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।