किच्छा में हाईवोल्टेज ड्रामाः तिरपाल लगाने पर बवाल! बेहड़ बोले- मेरे गाल पर मारा थप्पड़, भावुक हुए राजेश शुक्ला, कहा- तो छोड़ दूंगा राजनीति, गणेश गोदियाल ने राज्य निर्वाचन आयोग को भेजा पत्र
किच्छा। ऊधमसिंह नगर के किच्छा नगर पालिका चुनाव में मतदान के बीच शुरू हुआ विवाद स्ट्रांग रूम की सुरक्षा व्यवस्था तक पहुंच गया। देखते ही देखते मामले ने तूल पकड़ लिया और सियासी घमासान छिड़ गया। स्ट्रांग रूम के सामने तिरपाल लगाए जाने को लेकर कांग्रेस विधायक तिलकराज बेहड़ ने आपत्ति जताते हुए धरना शुरू कर दिया। कुछ ही देर में कांग्रेस के नगर पालिका अध्यक्ष पद प्रत्याशी राजेश प्रताप सिंह भी समर्थकों के साथ मौके पर पहुंच गए। मामला बढ़ा तो भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता और किच्छा के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला भी वहां पहुंच गए। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई और हाथापाई के आरोपों से माहौल गरमा गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने दोनों नेताओं को हिरासत में ले लिया। दरअसल, मंगलवार को किच्छा नगर पालिका और सिरौलीकलां नगर पंचायत के लिए मतदान हुआ। मतदान के बाद नवीन मंडी समिति परिसर में बनाए गए स्ट्रांग रूम में मतपेटियां रखी जा रही थीं। इसी दौरान स्ट्रांग रूम के सामने पर्दे लगाए जाने को लेकर विवाद शुरू हो गया। कांग्रेस विधायक तिलकराज बेहड़ और पार्टी प्रत्याशी राजेश प्रताप सिंह ने इसका विरोध किया। विधायक का कहना था कि स्ट्रांग रूम के सामने इस तरह पर्दे लगाए जाने से पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं। बताया जाता है कि पर्दे लगाए जाने को लेकर विधायक बेहड़ की अधिकारियों से भी कहासुनी हुई। इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ता और समर्थक मौके पर जुटने लगे। विधायक बेहड़ धरने पर बैठ गए और कांग्रेस प्रत्याशी राजेश प्रताप सिंह भी उनके साथ धरने में शामिल हो गए। भीड़ बढ़ने के साथ पुलिस ने मौके पर बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी। इसी बीच भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता और किच्छा के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला भी अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे। शुक्ला के पहुंचने के बाद कांग्रेस नेताओं और भाजपा नेता के बीच विवाद और बढ़ गया। दोनों पक्षों के समर्थक आमने-सामने आ गए। बताया जाता है कि इस दौरान धक्का-मुक्की और हाथापाई की स्थिति बन गई और अलग-अलग पक्षों ने एक-दूसरे पर मारपीट के आरोप लगाए हैं। कांग्रेस विधायक तिलकराज बेहड़ ने आरोप लगाया कि राजेश शुक्ला और उनके समर्थकों ने उनके साथ मारपीट की और उन्हें थप्पड़ मारा। इसी के विरोध में वह धरने पर बैठ गए। दूसरी ओर पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने आरोप लगाया कि स्ट्रांग रूम के पास पहुंचने के बाद कांग्रेस समर्थकों ने उनके साथ मारपीट की। शुक्ला ने मीडिया से बातचीत के दौरान भावुक होकर कहा कि यदि तिलकराज बेहड़ चाहते हैं कि वह राजनीति न करें तो वह राजनीति से संन्यास लेने के लिए भी तैयार हैं। उनके अनुसार, वह केवल स्ट्रांग रूम की स्थिति के बारे में जानकारी लेने वहां पहुंचे थे। हंगामे के बीच पुलिस ने दोनों पक्षों को अलग करने का प्रयास किया। स्थिति बिगड़ती देख पूर्व विधायक राजेश शुक्ला और विधायक तिलकराज बेहड़ को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, हिरासत के दौरान समर्थकों और पुलिस के बीच भी तीखी नोकझोंक हुई। धरने के दौरान विधायक तिलकराज बेहड़ के बेटे सौरभ बेहड़ ने भी प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरी कार्रवाई प्रशासन की मिलीभगत से हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव में हार हो रही है तो उसे स्वीकार करना चाहिए, लेकिन कथित तौर पर बेईमानी करके चुनाव कराने का कोई फायदा नहीं है। सौरभ बेहड़ ने यह भी दावा किया कि मुख्यमंत्री से कई बार फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन फोन नहीं उठाया गया। उन्होंने राजेश शुक्ला के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए उन्हें प्रदेश प्रवक्ता के पद से हटाने की मांग भी की। किच्छा विधायक तिलकराज बेहड़ ने कहा कि राजेश शुक्ला और उनके समर्थकों ने उनके गाल पर थप्पड़ मारा। उनके मुताबिक, इसी घटना के विरोध में उन्होंने धरना शुरू किया था। हालांकि घटना को लेकर दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग आरोप सामने आए हैं और पूरे घटनाक्रम की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। वहीं पूर्व विधायक राजेश शुक्ला मीडिया से बातचीत के दौरान भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि यदि तिलकराज बेहड़ चाहते हैं कि वह राजनीति न करें तो वह राजनीति से संन्यास ले लेंगे। शुक्ला का आरोप है कि वह स्ट्रांग रूम के पास केवल जानकारी लेने पहुंचे थेए लेकिन वहां उनके साथ मारपीट कर दी गई। उन्होंने कहा कि उनकी गलती सिर्फ इतनी थी कि वह स्ट्रांग रूम के पास पहुंचकर स्थिति के बारे में पूछने गए थे। उन्होंने बेहड़ से जुड़े समर्थकों पर मारपीट का आरोप लगाया।
हरीश रावत ने उठाए चुनावी प्रक्रिया पर सवाल
किच्छा की घटना के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने घटना को लेकर चुनावी प्रक्रिया और कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। रावत ने आरोप लगाया कि किच्छा में स्ट्रांग रूम देखने गए कांग्रेस प्रत्याशी और स्थानीय विधायक के साथ मारपीट की गई और यह घटना पुलिस की मौजूदगी में हुई। उन्होंने चुनाव आयोग से मामले का तत्काल संज्ञान लेने की मांग की और कहा कि चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली किसी भी घटना को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।
गणेश गोदियाल ने राज्य निर्वाचन आयोग को भेजा पत्र
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने किच्छा नगर पालिका परिषद और सिरौलीकलां नगर पंचायत में चुनावी प्रक्रिया को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया कि किच्छा में विधायक तिलकराज बेहड़ और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की घटना सामने आई है। पार्टी ने प्रत्याशियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
पहले से हाईकोर्ट में लंबित है मतगणना का मामला
किच्छा और सिरौलीकलां के निकाय चुनाव की मतगणना को लेकर मामला पहले से न्यायालय में लंबित है। मतदान से पहले ही मतगणना पर अगले आदेश तक रोक लगाई गई थी। ऐसे में मतदान के बाद मतपेटियों को स्ट्रांग रूम में सुरक्षित रखने की प्रक्रिया और उसकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक दलों की निगाहें भी बनी हुई हैं। मतदान से एक दिन पहले जिला निर्वाचन अधिकारी नितिन सिंह भदौरिया और एसएसपी अजय गणपति ने किच्छा के नवीन मंडी समिति स्थित स्ट्रांग रूम का निरीक्षण किया था। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था, बैरिकेडिंग और सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था की जानकारी ली गई थी। प्रशासन ने स्ट्रांग रूम परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आवश्यक निर्देश भी दिए थे।
500 मीटर के दायरे में सुरक्षा बढ़ाई
इस घटना के बाद पुलिस ने स्ट्रांग रूम के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी। पुलिस की ओर से लोगों को स्ट्रांग रूम से करीब 500 मीटर दूर रहने के निर्देश दिए गए। मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। प्रशासन की ओर से पूरे क्षेत्र की निगरानी की जा रही है। किच्छा नगर पालिका चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस के राजेश प्रताप सिंह और भाजपा के संदीप अरोड़ा प्रमुख प्रत्याशियों में शामिल हैं। चुनाव प्रचार के दौरान भी दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक मुकाबला काफी सक्रिय रहा था। मंगलवार को मतदान के बाद स्ट्रांग रूम के बाहर हुआ विवाद अब चुनावी माहौल को और गरमा गया है। फिलहाल पुलिस और प्रशासन की प्राथमिकता स्ट्रांग रूम की सुरक्षा बनाए रखना और किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति को रोकना है। दोनों पक्षों की ओर से लगाए गए आरोपों के बीच अब नजर इस बात पर है कि पुलिस जांच में घटना के पूरे क्रम को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं और चुनाव आयोग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।