हल्द्वानी में युवती लापता:तहरीर में रहमत नाम पर FIR में अज्ञात!सत्यापन न होने से आरोपी की तलाश में आई अड़चन
हल्द्वानी के मुखानी थाना क्षेत्र की अमरावती कॉलोनी से 19 वर्षीय युवती के रहस्यमय तरीके से लापता होने का मामला अब पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पीड़ित परिवार ने अपनी तहरीर में एक व्यक्ति को नामजद किया, तो आखिर पुलिस ने प्राथमिकी (FIR) “अज्ञात” के खिलाफ क्यों दर्ज की?
घटना 26 फरवरी की है, जब जीजीआईसी में पढ़ने वाली युवती स्कूल के लिए निकली, लेकिन शाम तक घर नहीं लौटी। परिजनों के मुताबिक, युवती मोहल्ले में सिलाई का काम सीखने के लिए एक दर्जी, रहमत, के पास जाती थी—जो उसी दिन के बाद से खुद भी लापता बताया जा रहा है।
पीड़ित पिता ने साफ तौर पर रहमत (उम्र लगभग 40-45 वर्ष) पर बेटी के अपहरण का आरोप लगाते हुए पुलिस को लिखित तहरीर दी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि पुलिस ने न केवल शुरुआत में FIR दर्ज करने में देरी की, बल्कि जब मामला बढ़ते दबाव के बाद दर्ज किया भी गया, तो उसमें आरोपी का नाम शामिल नहीं किया गया।
पीड़ित पिता ने तहरीर में दिया था आरोपी का नाम, FIR में ‘अज्ञात’ क्यों?
यहां सबसे बड़ा विवाद यही है कि जब तहरीर में आरोपी का नाम स्पष्ट रूप से लिखा गया था, तो FIR में उसे “अज्ञात” क्यों कर दिया गया? इस कदम से स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ गई है और पुलिस की नीयत पर सवाल उठने लगे हैं, आरोप है कि पीड़ित परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है, इसलिए पुलिस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही।
एफआईआर में भले ही अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है लेकिन पुलिस आरोपी रहमत की ही तलाश कर रही है। मामले की जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी रहमत मूल रूप से पीलीभीत का रहने वाला है, लेकिन उसका कोई ठोस सत्यापन रिकॉर्ड नहीं मिला। जिस जगह वह दुकान चलाता था, वहां अब ब्यूटी पार्लर खुल चुका है। इससे यह भी सवाल उठ रहा है कि बिना सत्यापन के वह लंबे समय तक इलाके में कैसे काम करता रहा।
वही इस मामले में पुलिस का पक्ष भी सामने आया है। एसपी सिटी मनोज कुमार कत्याल का कहना है कि सूचना मिलते ही FIR दर्ज कर ली गई और आरोपी की तलाश के लिए टीमें गठित कर दी गई हैं। जल्द ही युवती की बरामदगी और आरोपी की गिरफ्तारी का दावा भी किया जा रहा है। लेकिन सवाल अब भी कायम है कि जब आरोपी का नाम तहरीर में था, तो FIR में क्यों नहीं?
FIR दर्ज करने में देरी क्यों हुई?
क्या दबाव के बिना पुलिस हरकत में नहीं आती? इस मामले में भी जब विभिन्न संगठनों ने हस्तक्षेप किया तब पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की । यह मामला सिर्फ एक युवती के लापता होने का नहीं, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली पर भरोसे का भी है।