International Women’s Day 2026: क्यों मनाया जाता है 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस, जानिए पूरा इतिहास
फरवरी का महीना अक्सर अलग-अलग “डे” मनाने में गुजर जाता है,इस महीने दिन भी कम होते हैं तो महीना कब गुजरता है पता ही नहीं चलता। लेकिन इसके बाद मार्च का महीना एक खास संदेश लेकर आता है, क्योंकि इसी महीने पूरी दुनिया में महिलाओं के सम्मान और अधिकारों को समर्पित अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women’s Day) मनाया जाता है।
सोशल मीडिया से लेकर संस्थानों और संगठनों तक, हर जगह महिला सशक्तिकरण और सम्मान की बातें होती हैं। दुनिया भर में हर साल 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। तकनीकी रूप से देखा जाए तो यह दिवस अब एक सदी से भी अधिक समय से मनाया जा रहा है। लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर 8 मार्च को ही महिला दिवस क्यों मनाया जाता है?
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत का श्रेय जर्मन समाजवादी नेता और महिला अधिकारों की प्रबल समर्थक क्लारा जेटकिन को दिया जाता है। उन्होंने महिलाओं के अधिकार, समानता और श्रमिक अधिकारों के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया।
साल 1910 में डेनमार्क के कोपेनहेगन में कामकाजी महिलाओं का एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित हुआ था। इस सम्मेलन में करीब 17 देशों की लगभग 100 महिला प्रतिनिधि शामिल हुई थीं। इसी मंच पर क्लारा जेटकिन ने पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा, जिसे सभी प्रतिनिधियों ने समर्थन दिया।
दरअसल, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की जड़ें मजदूर आंदोलन से जुड़ी हुई हैं। 1908 में न्यूयॉर्क सिटी में करीब 15 हजार महिलाओं ने एक बड़ी रैली निकाली थी। इस रैली में महिलाओं ने कई महत्वपूर्ण मांगें उठाईं, जिनमें शामिल थीं जिनमें
काम के घंटे कम किए जाएं
बेहतर वेतन दिया जाए
महिलाओं को मतदान का अधिकार मिले इत्यादि मांगे शामिल थीं इसके एक साल बाद सोशलिस्ट पार्टी ऑफ अमेरिका ने 8 मार्च को पहला राष्ट्रीय महिला दिवस घोषित किया।
क्लारा जेटकिन के प्रस्ताव के बाद 1911 में ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, जर्मनी और स्विट्ज़रलैंड जैसे देशों में पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया। इसके बाद यह आंदोलन धीरे-धीरे दुनिया भर में फैलने लगा।
महिला अधिकारों का संघर्ष यहीं नहीं रुका। 1917 में रूस में महिलाओं ने “ब्रेड एंड पीस” (रोटी और शांति) की मांग को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन किया। इस आंदोलन का प्रभाव इतना बड़ा था कि उस समय के जार निकोलस द्वितीय को सत्ता छोड़नी पड़ी और अंतरिम सरकार ने महिलाओं को मतदान का अधिकार दे दिया।
रूस उस समय जूलियन कैलेंडर का इस्तेमाल करता था। जिस दिन महिलाओं ने यह आंदोलन शुरू किया, वह तारीख 23 फरवरी थी, जो ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार 8 मार्च के बराबर पड़ती है। इसके बाद ही 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मान्यता मिल गई।
आज दुनिया भर में महिला दिवस अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है। चीन में कई कार्यालयों में महिलाओं को आधे दिन की छुट्टी दी जाती है।
अमेरिका में पूरा मार्च महीना Women’s History Month के रूप में मनाया जाता है। कई देशों में इस दिन महिला अधिकार, समानता और सशक्तिकरण पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। हालांकि सवाल यह भी उठता है कि क्या साल में सिर्फ एक दिन महिला दिवस मनाने से महिलाओं को वास्तविक सम्मान मिल जाता है?
आज भी दुनिया के कई हिस्सों में महिलाएं अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही हैं। एक ओर समाज महिला दिवस मनाता है, तो दूसरी ओर बेटियों के साथ होने वाले अपराध और भेदभाव की खबरें भी सामने आती रहती हैं। दरअसल, महिलाएं समाज का वह आईना हैं जिसके बिना दुनिया की कल्पना अधूरी है। इसलिए महिला सम्मान केवल 8 मार्च तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि साल के हर दिन महिलाओं को समान अधिकार, सम्मान और सुरक्षा मिलनी चाहिए। महिला दिवस मनाइए, लेकिन सिर्फ औपचारिकता के तौर पर नहीं—बल्कि हर दिन महिलाओं के सम्मान और बराबरी के संकल्प के साथ।