उत्तराखंड में बदलते मौसम के साथ बच्चों पर मंडराया वायरल संक्रमण का खतरा, अस्पतालों में बढ़े 'हैंड-फुट-माउथ डिजीज' के मामले
देहरादून। गर्मी से सर्दी की ओर करवट लेते मौसम ने उत्तराखंड में बच्चों की सेहत पर असर डालना शुरू कर दिया है। राज्य के अस्पतालों की ओपीडी में इन दिनों वायरल संक्रमण के मामलों में तेजी से उछाल देखने को मिल रहा है। सामान्य सर्दी-जुकाम और बुखार के साथ-साथ अब बच्चों में 'हैंड-फुट-माउथ डिजीज' के मामले भी सामने आ रहे हैं, जिसने अभिभावकों और स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है।
मौसम में बदलाव के साथ उत्तराखंड में बच्चों की सेहत को लेकर सतर्कता बढ़ाने की जरूरत है। गर्मी से सर्दी की ओर बढ़ते मौसम के बीच अस्पतालों की बाह्य रोगी सेवाओं में बुखार, सर्दी, खांसी और जुकाम से पीड़ित बच्चों के पहुंचने के साथ हैंड-फुट-माउथ डिजीज के मामले भी सामने आ रहे हैं। यह संक्रामक वायरल बीमारी मुख्य रूप से छोटे बच्चों को प्रभावित करती है। चिकित्सकों ने अभिभावकों को बीमारी के शुरुआती लक्षण पहचानने, बच्चों की स्वच्छता का ध्यान रखने और संक्रमण फैलने से रोकने के लिए जरूरी सावधानियां अपनाने की सलाह दी है। दून मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक के अनुसार, इन दिनों वायरल संक्रमण के लक्षणों वाले बच्चे ओपीडी में पहुंच रहे हैं। इनमें हैंड-फुट-माउथ डिजीज के तीन से चार मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल जाने वाले बच्चों के बीच यह संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। संक्रमित बच्चे के संपर्क में आने से परिवार के अन्य बच्चों तक भी बीमारी पहुंच सकती है। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष नजर रखनी चाहिए। हैंड-फुट-माउथ डिजीज के प्रमुख लक्षणों में बुखार, मुंह के अंदर छाले या घाव तथा हथेलियों और पैरों के तलवों पर लाल दाने या चकत्ते शामिल हो सकते हैं। कुछ बच्चों को मुंह में दर्द होने के कारण खाने-पीने में परेशानी भी हो सकती है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर बच्चे को स्वयं दवा देने के बजाय बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। विशेषज्ञों के मुताबिक, बीमारी के दौरान बच्चे की स्थिति पर नजर रखना जरूरी है। यदि बच्चा पर्याप्त पानी नहीं पी पा रहा है, पेशाब कम हो रहा है, असामान्य रूप से सुस्त है या उसकी हालत बिगड़ रही है, तो तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। छोटे बच्चों में पानी की कमी होने का खतरा विशेष रूप से ध्यान देने योग्य है। चिकित्सकों ने संक्रमण से बचाव के लिए कुछ जरूरी उपाय अपनाने की सलाह दी है। बच्चों को नियमित रूप से साबुन और पानी से हाथ धुलवाएं। खिलौनों, दरवाजों के हत्थों और बच्चों के बार-बार छूने वाली सतहों की सफाई रखें। संक्रमित बच्चे के साथ बर्तन, तौलिया और अन्य निजी उपयोग की वस्तुएं साझा करने से बचें। यदि बच्चे में संक्रमण के लक्षण दिखाई दें, तो उसे स्कूल या अन्य सामूहिक गतिविधियों में भेजने से पहले चिकित्सकीय सलाह लें। बीमारी के दौरान बच्चे को आराम दें और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ उपलब्ध कराएं। मुंह में छाले होने पर खाने-पीने में परेशानी बढ़ सकती है, इसलिए बच्चे की स्थिति के अनुसार चिकित्सक की सलाह पर ध्यान देना जरूरी है। डॉ. अशोक ने अभिभावकों को बच्चों के खानपान, साफ-सफाई और नियमित टीकाकरण पर ध्यान देने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि संक्रमण के लक्षणों को शुरुआत में पहचानना और समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेना महत्वपूर्ण है। वायरल बीमारियों में बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं देना उचित नहीं है। हैंड-फुट-माउथ डिजीज आमतौर पर अपने आप ठीक हो जाती है, लेकिन कुछ बच्चों में जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। इसलिए लक्षणों को हल्के में लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है। बदलते मौसम में बच्चों की सेहत की निगरानी, व्यक्तिगत स्वच्छता और संक्रमण की रोकथाम के उपाय अपनाकर बीमारी के प्रसार को कम करने में मदद मिल सकती है।