जम्मू-कश्मीर में आसमानी आफत: पुंछ और राजौरी में बादल फटने से तबाही, 6 की मौत,दिल्ली से वापस लौटेंगे सीएम उमर
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के पीर पंजाल क्षेत्र में कुदरत का कहर टूटा है। पुंछ और राजौरी जिलों में बीती रात बादल फटने के बाद आई भीषण फ्लैश फ्लड (अचानक आई बाढ़) ने भारी तबाही मचाई है। उफनती लहरों की चपेट में आने से कई रिहायशी इलाके मलबे में तब्दील हो गए और पानी में डूब गए। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक कम से कम छह लोगों की मौत हो चुकी है। हालात की गंभीरता को देखते हुए जम्मू-कश्मीर सरकार ने पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। वहीं, दिल्ली दौरे पर गए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने संकट की इस घड़ी में अपना दौरा बीच में ही छोड़ दिया है और जमीनी हालात की खुद कमान संभालने के लिए वे वापस जम्मू लौट रहे हैं।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सबसे ज्यादा नुकसान पुंछ जिले में हुआ है। यहाँ सुरनकोट तहसील के एक सुदूर और दुर्गम गांव में बाढ़ की चपेट में आने से चार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इसके अलावा, पुंछ के ही हवेली इलाके से एक और व्यक्ति की मौत की खबर है। उधर, राजौरी जिले में भी बाढ़ के तांडव ने एक व्यक्ति की जान ले ली है। प्रशासन अभी मृतकों की शिनाख्त करने और उनके परिजनों से संपर्क साधने की प्रक्रिया में जुटा है। राजौरी शहर की बेला कॉलोनी में तो मंजर बेहद खौफनाक था। बादल फटने के बाद आए सैलाब में खड़ी कारें, कीमती प्रॉपर्टी और सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर ताश के पत्तों की तरह बह गए। राजौरी शहर और उसके बाहरी इलाकों में करोड़ों रुपये की संपत्ति, रिहायशी मकान और लहलहाती खेती की जमीन पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। तबाही की सूचना मिलते ही आपदा प्रबंधन, स्थानीय पुलिस और सेना की रेस्क्यू टीमों को तुरंत मोर्चे पर तैनात किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ प्रभावित और निचले इलाकों में फंसे लोगों को निकालने के लिए इमरजेंसी रेस्क्यू ऑपरेशन तेज कर दिया गया है। नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए तटीय इलाकों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में शिफ्ट किया जा रहा है। जिला प्रशासनों ने आम जनता से बेहद संवेदनशील और उफनती नदियों के पास न जाने की सख्त अपील की है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि मूसलाधार बारिश का सिलसिला ऐसे ही जारी रहा, तो जान-माल का नुकसान और ज्यादा बढ़ सकता है। लगातार हो रही बारिश के बावजूद राहत की बात यह है कि रविवार सुबह तक श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात सामान्य रूप से चल रहा था। इसके साथ ही बांदीपोरा-गुरेज, कुपवाड़ा-करनाह और ऐतिहासिक मुगल रोड भी फिलहाल वाहनों की आवाजाही के लिए खुले हुए हैं। हालांकि, प्रशासन ने एहतियात के तौर पर और खराब मौसम की गंभीरता को देखते हुए सोनमर्ग-लेह मार्ग को पूरी तरह से बंद कर दिया है। जम्मू डिवीजन में पैदा हुए इन बदतर हालात पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला खुद पैनी नजर बनाए हुए हैं। सोमवार को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने गए मुख्यमंत्री ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जम्मू वापसी का फैसला किया है। उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा मौसम विभाग की चेतावनी और जम्मू डिवीजन के कुछ हिस्सों में पैदा हो रहे हालात की गंभीरता को देखते हुए, मैं आज दोपहर ही दिल्ली से जम्मू के लिए उड़ान भरूंगा, ताकि जमीन पर राहत कार्यों की खुद निगरानी कर सकूं। जिन लोगों को इस आपदा में संपत्ति का नुकसान हुआ है, सरकार उनकी मदद के लिए हर मुमकिन कोशिश करेगी। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके लौटने के बावजूद जंतर-मंतर पर होने वाले प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यह प्रदर्शन जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व में तय योजना के अनुसार ही आगे बढ़ेगा। फिलहाल, पूरे प्रशासन को प्रभावितों तक तुरंत राहत सामग्री और चिकित्सा सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।