ऑपरेशन सिंदूर को लेकर क्या देश से सच्चाई छिपाई गई थी?संसद में राजनाथ सिंह ने कहा था ‘एक भी जवान शहीद नहीं हुआ’,अब वॉर मेमोरियल पर दर्ज हुए छह नाम!

Was the truth hidden from the country? Rajnath Singh had stated in Parliament that "not a single soldier was martyred," yet now, six names have been inscribed at the War Memorial.

ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सरकार के दावों और अब सामने आए आधिकारिक रिकॉर्ड के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। ऑपरेशन सिंदूर को लेकर विपक्ष के सवाल पूछने पर संसद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पूरे विश्वास के साथ कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर में भारत का एक भी सैनिक शहीद नहीं हुआ।

यह बयान लोकसभा की कार्यवाही का हिस्सा था और देश ने इसे सुना भी और सराहा भी। लेकिन अब राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (नेशनल वॉर मेमोरियल) के 'रोल ऑफ ऑनर' में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए छह जांबाज सैनिकों के नाम दर्ज किए जाने के बाद बहस छिड़ गई है। जिनमें सूबेदार मेजर पवन कुमार, रायफलमैन सुनील कुमार, लांसनायक दिनेश कुमार, एवी मूद मुरलीनायक, हवलदार सुनील कुमार सिंह और सुरेंद्र कुमार के नाम अब आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के रिकॉर्ड का हिस्सा हैं।

ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि यदि संसद में कहा गया था कि ऑपरेशन में एक भी भारतीय जवान शहीद नहीं हुआ, तो फिर राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर दर्ज ये छह नाम किस सच्चाई की ओर इशारा कर रहे हैं? क्या उस समय संसद को अधूरी जानकारी दी गई थी या सच छिपाया गया था? क्या सरकार ने शहादत की जानकारी सार्वजनिक करने में देरी की? या फिर बाद में तथ्यों को स्वीकार किया गया?

देश अपने वीर सैनिकों की शहादत को केवल आंकड़ों में नहीं देखता। शहादत राष्ट्र का सम्मान है और उससे जुड़ी हर जानकारी जनता के प्रति जवाबदेही का विषय भी है। इसलिए अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि संसद में दिए गए बयान और राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के रिकॉर्ड के बीच मौजूद इस अंतर पर अब क्या जवाब देंगे राजनाथ सिंह?

क्योंकि युद्ध की जीत जितनी महत्वपूर्ण होती है, उतना ही महत्वपूर्ण उन वीरों का सम्मान भी होता है जिन्होंने उस जीत की कीमत अपनी जान देकर चुकाई।