उत्तराखण्डः सच्चे पर्यावरण मित्र हैं कूड़ा बीनने वाले! उनके बच्चों का विकास भी बेहद जरूरी, विधिक सेवा प्राधिकरण की रिपोर्ट पर हाईकोर्ट सख्त! शहरी विकास सचिव से तीन हफ्ते में मांगा जवाब
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य में कूड़ा बीनने वाले लोगों व उनके बच्चों को सरकार द्वारा जारी सरकारी योजनाओं का लाभ नही दिए जाने के मामले पर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई की। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने शहरी विकास सचिव को तीन सप्ताह के भीतर शपथपत्र दाखिल कर यह बताने के निर्देश दिए हैं कि इन लोगों के उत्थान के लिए संचालित सामाजिक कल्याण योजनाओं पर क्या कार्रवाई की गई है और उन्हें धरातल पर किस तरह लागू किया जा रहा है। मामले की अगली सुनवाई के लिए 3 सप्ताह बाद की तिथि नियत की गई है। बता दें कि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने अपनी एक सर्वे रिपोर्ट में पाया था कि उच्च न्यायालय व अन्य जिला विधिक प्राधिकरणों की रिपोर्ट के अनुसार कूड़ा बीनने वालों को जरूरी सामान व उनके बच्चों को राज्य व केंद्र सरकार के द्वारा प्रदत्त सुविधाओं का सहारा नही मिल रहा है। जिसकी वजह से उनके बच्चे वही का वही काम करते आ रहे हैं, जिससे उनका मानसिक व बौद्धिक विकास नही हो पा रहा है। इसलिए उन्हें भी केंद्र व सरकार की तरफ से जारी सभी योजनाओं का लाभ दिया जाय। जैसे आम नागरिकों को मिल रहा है। ताकि उनके बच्चों को वही कार्य नही करना पड़े। उनके बच्चों का भी विकास होना अति आवशयक है। क्योंकि वे हमारे समाज का अहम हिस्से से जुड़े हुए हैं। क्योंकि वे एक सच्चे पर्यावरण मित्र भी हैं। कम से कम सरकार द्वारा जारी योजनाओं का लाभ उन्हें मिल सके।