उत्तराखण्ड हेलीकॉप्टर हादसाः बदरीनाथ से लौट रहा विमान क्रैश! पायलट समेत सभी 6 लोगों की मौत, खराब मौसम के बीच उड़ानों पर उठे सवाल
देहरादून। उत्तराखंड के चमोली जिले में शुक्रवार को एक बड़ा विमान हादसा हो गया। बदरीनाथ धाम से तीर्थयात्रियों को लेकर देहरादून लौट रहा एक चार्टर्ड हेलीकॉप्टर जोशीमठ के समीप पांडुकेश्वर में भेड़ गदेरे की पहाड़ी पर अनियंत्रित होकर क्रैश हो गया। चट्टान से टकराने के बाद हुए इस भीषण हादसे में हेलीकॉप्टर सवार पायलट समेत सभी छह लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी के अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर निजी विमानन सेवा प्रदाता ट्रांस भारत एविएशन का था। हेलीकॉप्टर ने बदरीनाथ से देहरादून के सहस्रधारा हेलीपैड के लिए दोपहर करीब 1ः12 बजे उड़ान भरी थी, जिसके कुछ देर बाद ही उसका संपर्क टूट गया। सूचना मिलते ही सेना, एसडीआरएफ और जिला प्रशासन की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और संयुक्त राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। सेना ने घटनास्थल पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन की कमान संभाल ली है। हादसे का शिकार हुए हेलीकॉप्टर को 48 वर्षीय अनुभवी पायलट दिल्ली निवासी कैप्टन हिमांशु सभरवाल उड़ा रहे थे। इसमें सवार सभी पांचों यात्री कर्नाटक (बेंगलुरु) के निवासी थे। मृतकों की पहचान 41 वर्षीय प्रतापा, 44 वर्षीय अरुण सालुंके, 39 वर्षीय वीबी शंकर गौड़ा, 50 वर्षीय सुधीर के और एसएस नटराजा के रूप में हुई है।


खराब मौसम के बीच उड़ानों पर उठे सवाल
हादसे के बाद क्षेत्र में प्रतिकूल मौसम के बावजूद जारी उड़ानों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, दृश्यता कम होने और मौसम खराब होने के बावजूद शुक्रवार को कुल 12 चार्टर्ड उड़ानों का संचालन किया गया। दोपहर 1ः05 बजे पहली उड़ान देहरादून पहुंची, जिसके बाद 1ः12 बजे इस हेलीकॉप्टर ने उड़ान भरी और वह लापता हो गया। हैरानी की बात यह है कि संपर्क टूटने के बाद भी दोपहर 2 बजे के बाद तीन अन्य उड़ानें भरी गईं। हादसे की गंभीरता को देखते हुए नागरिक उड्डयन विभाग ने एहतियात के तौर पर ट्रांस भारत एविएशन की सभी सेवाओं पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
मुख्यमंत्री ने जताया गहरा शोक
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि जोशीमठ के निकट हेलीकॉप्टर क्रैश होने की सूचना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रशासन और सेना की टीमें राहत कार्य में जुटी हैं और वे स्वयं पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। उच्चाधिकारियों को हादसे के कारणों की विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं।