Oct 30, 2026 Login
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उत्तराखंड:कृपया ध्यान दें!केवल आवासीय क्षेत्र में ही व्यावसायिक गतिविधियों पर होगी सीलिंग, हर दुकान-होटल पर लागू नहीं होगा सुप्रीम कोर्ट का आदेश!

Uttarakhand: Please note! Commercial activities will only be sealed in residential areas; the Supreme Court order will not apply to every shop or hotel.

सुप्रीम कोर्ट के आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर दिए गए आदेश के बाद से अब उत्तराखंड में भी लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। आदेश को लेकर कारोबारियों से लेकर भवन स्वामियों तक में कई तरह की चर्चाएं और आशंकाएं हैं। कहीं इसे हर दुकान, होटल और रेस्टोरेंट पर कार्रवाई का संकेत माना जा रहा है तो कहीं आवासीय भवनों में चल रहे सभी कारोबार पर संकट की बात कही जा रही है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के आदेश का वास्तविक दायरा इससे अलग है। आदेश को ठीक से समझे बिना पैदा हो रही इस कश्मकश के बीच यह जानना जरूरी है कि कोर्ट ने किन क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक और सीलिंग के निर्देश दिए हैं और किन क्षेत्रों को फिलहाल इससे अलग रखा है।
सुप्रीम कोर्ट ने 22 सितंबर 2026 को दिए अपने आदेश में उन क्षेत्रों को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं, जिन्हें मास्टर प्लान में विशेष रूप से आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित किया गया है और जहां सक्षम प्राधिकरण की ओर से भी केवल आवासीय उपयोग की अनुमति है। ऐसे क्षेत्रों में यदि व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होती पाई जाती हैं तो संबंधित परिसर को पहले चरण में सील करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका अर्थ यह है कि शहर या गांव में स्थित किसी भी भवन में दुकान, होटल या रेस्टोरेंट संचालित होने मात्र से उसे इस आदेश के तहत कार्रवाई के दायरे में नहीं माना जा सकता। इसके लिए यह देखना अनिवार्य होगा कि संबंधित भवन किस तरह के भूमि उपयोग वाले क्षेत्र में स्थित है और उसे किस उपयोग के लिए स्वीकृति दी गई है।

आदेश का एक महत्वपूर्ण पहलू मिश्रित भूमि उपयोग यानी मिक्स्ड लैंड यूज से जुड़े क्षेत्रों को लेकर है। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे क्षेत्रों में, जहां भूमि उपयोग की स्थिति स्पष्ट रूप से केवल आवासीय या व्यावसायिक निर्धारित नहीं है और मिश्रित उपयोग का प्रश्न है, फिलहाल मौजूदा स्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। ऐसे मामलों में दस्तावेजों और कानूनी पहलुओं की जांच की जा सकती है, लेकिन उन्हें केवल व्यावसायिक गतिविधि संचालित होने के आधार पर आवासीय क्षेत्र मानकर सीलिंग की कार्रवाई नहीं की जा सकती।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि भवन निर्माण और उसके उपयोग के लिए सक्षम प्राधिकरण से मिली स्वीकृति महत्वपूर्ण होगी। यदि किसी क्षेत्र में केवल आवासीय उपयोग की अनुमति है और वहां स्वीकृत उपयोग के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं तो कार्रवाई की जा सकती है। इसी तरह पूरी तरह अनधिकृत निर्माण और बिना सक्षम प्राधिकरण की अनुमति के बनी संरचनाओं के खिलाफ संबंधित कानूनों के तहत सीलिंग अथवा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का रास्ता खुला रहेगा।

इस आदेश के बाद नैनीताल सहित कई अन्य जिलों में भी आवासीय भवनों में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच का विषय सामने आया है। ऐसे में किसी भी कार्रवाई से पहले जिला विकास प्राधिकरण के लिए यह जरूरी होगा कि वह संबंधित क्षेत्र का स्वीकृत मास्टर प्लान, भूमि उपयोग का वर्गीकरण और भवन का अनुमोदित नक्शा पहले देखा जाए।

नैनीताल और रामनगर में संचालित सभी होटल, रेस्टोरेंट, दुकानें या अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान  इस आदेश के दायरे में नहीं आ जाते। प्रत्येक मामले का निर्धारण उसके वास्तविक भूमि उपयोग और वैधानिक स्वीकृति के आधार पर ही होगा।

कोर्ट के आदेश में कहा गया है:
"In areas specifically shown as residential, where the permission granted by the State Government is only for residential use..."
अर्थात जिन क्षेत्रों को स्पष्ट रूप से आवासीय दर्शाया गया है और जहां सरकार या सक्षम प्राधिकरण ने केवल आवासीय उपयोग की अनुमति दी है, वहां व्यावसायिक गतिविधियां नहीं हो सकतीं। ऐसी गतिविधि मिलने पर संबंधित परिसर को पहले चरण में सील किया जाना है।

सुप्रीम कोर्ट के 22 सितंबर 2026 के आदेश को पढ़ने के बाद स्पष्ट होता है कि यह आदेश हर आवासीय मकान, हर दुकान, हर होटल या हर रेस्टोरेंट पर  लागू नहीं होता। इसका मुख्य लक्ष्य ऐसे क्षेत्र हैं जिन्हें अधिकृत मास्टर प्लान और भूमि उपयोग के रिकॉर्ड में विशेष रूप से केवल आवासीय (Exclusively Residential) निर्धारित किया गया है, लेकिन वहां व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। इसलिए कारोबारियों और भवन स्वामियों को किसी तरह की अफवाह या अधूरी जानकारी के आधार पर घबराने की जरूरत नहीं है। उन्हें अपने भवन के स्वीकृत नक्शे और संबंधित क्षेत्र के मास्टर प्लान में निर्धारित भूमि उपयोग की स्थिति की जानकारी रखनी चाहिए। मामले में अगली सुनवाई 23 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है।