उत्तराखण्डः प्रारंभिक शिक्षा निदेशक से मारपीट के मामले ने पकड़ा तूल! बोर्ड परीक्षाओं के बीच आक्रोशित हुए शिक्षक, भाजपा विधायक के समर्थकों पर आरोप
देहरादून। राजधानी देहरादून में प्रारंभिक शिक्षा निदेशक के साथ मारपीट का मामला अब तूल पकड़ता नजर आ रहा है। इस मामले में अब प्रदेशभर के शिक्षक आक्रोशित हो उठे हैं और आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग उठने लगी। बता दें आज शनिवार को प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय कुमार नौडियाल के साथ मारपीट का प्रकरण सामने आया। मारपीट करने का आरोप भाजपा विधायक उमेश शर्मा काऊ पर लगे हैं। घटनाक्रम के कुछ वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें निदेशक के कक्ष में तीखी बहस, धक्का-मुक्की और कुर्सियां फेंके जाने जैसी तस्वीरें दिखाई दे रही हैं। वीडियो सामने आने के बाद मामला और भी गरमा गया है।
पूरा विवाद शनिवार को उस समय सामने आया, जब विधायक उमेश शर्मा काऊ अपने समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ शिक्षा निदेशालय पहुंचे। बताया जा रहा है कि वे एक सरकारी विद्यालय का नाम बदले जाने के मुद्दे को लेकर बातचीत करने पहुंचे थे। शुरुआत में माहौल पूरी तरह शांतिपूर्ण था। विधायक ने प्रशासन के सामने अपनी बात रखी। बातचीत के दौरान किसी बात पर कहासुनी बढ़ गई। धीरे-धीरे माहौल तनावपूर्ण होता चला गया। आरोप है कि इसी दौरान विधायक और उनके साथ आए कार्यकर्ताओं ने प्रारंभिक शिक्षा निदेशक के कार्यालय में घुसकर उनके साथ मारपीट की। प्रारंभिक शिक्षा निदेशक का कहना है कि यह पूरी घटना न सिर्फ प्रशासनिक मर्यादाओं के खिलाफ है, बल्कि एक वरिष्ठ अधिकारी की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। हालांकि हैरानी की बात यह रही कि यह मामला फिलहाल पुलिस कार्रवाई तक नहीं पहुंच पाया है, लेकिन इसके दुष्परिणाम अब शिक्षा व्यवस्था और बोर्ड परीक्षाओं तक जा पहुंचे हैं।
घटना की जानकारी मिलते ही प्रदेश के शिक्षक संगठनों में भारी रोष फैल गया। शिक्षकों का कहना है कि यदि एक वरिष्ठ शिक्षा अधिकारी अपने ही कार्यालय में सुरक्षित नहीं है, तो आम शिक्षक और कर्मचारी किस भरोसे से काम करें। इसी आक्रोश के चलते शिक्षकों ने शिक्षा निदेशालय के बाहर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने निदेशालय के सामने मौजूद सड़क को जाम कर दिया, जिससे यातायात भी प्रभावित हुआ। शिक्षकों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। शिक्षक संगठनों के बीच इस बात को लेकर गंभीर चर्चा चल रही है कि क्या वे आगामी बोर्ड परीक्षाओं में अपनी सेवाएं देंगे या नहीं। यह निर्णय बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि बोर्ड परीक्षाओं के संचालन में शिक्षकों की भूमिका अनिवार्य होती है, चाहे वह परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था हो, उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन या निगरानी का कार्य।