उत्तराखंड:कोर्ट परिसर और सरकारी दफ्तरों के गंदे व बंद शौचालयों पर हाई कोर्ट में जनहित याचिका, पूरे उत्तराखंड में सुधार के निर्देश देने की मांग

Uttarakhand: Public interest litigation in the High Court on dirty and closed toilets in court premises and government offices, demanding instructions for improvement across Uttarakhand

नैनीताल। उत्तराखंड हाई कोर्ट में हरिद्वार जिले के कोर्ट परिसरों और विभिन्न सरकारी कार्यालयों में सार्वजनिक शौचालयों की बदहाल स्थिति को लेकर एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिका नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट की ओर से दाखिल की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि कई सार्वजनिक शौचालय या तो बंद पड़े हैं, गंदगी से भरे हैं, क्षतिग्रस्त हैं अथवा उन्हें स्टोर रूम के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। याचिका में रजिस्ट्रार जनरल, उत्तराखंड हाई कोर्ट, जिलाधिकारी हरिद्वार, एसएसपी हरिद्वार और तहसीलदार हरिद्वार को पक्षकार बनाया गया है। 

याचिका के अनुसार, 3 जुलाई 2026 को संस्था ने हरिद्वार के कलेक्ट्रेट, एसएसपी कार्यालय, जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर तथा तहसील परिसर का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सार्वजनिक शौचालयों की तस्वीरें भी ली गईं, जिनमें कई शौचालय बंद, गंदे, क्षतिग्रस्त अथवा सामान रखने के लिए उपयोग किए जाते हुए पाए गए। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को विस्तृत प्रतिनिधित्व भी भेजा गया, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।  

याचिका में कहा गया है कि इन कार्यालयों में प्रतिदिन हजारों लोग, जिनमें वकील, वादकारी, महिलाएं, वरिष्ठ नागरिक, दिव्यांगजन और ट्रांसजेंडर समुदाय के लोग शामिल हैं, आते हैं। खराब शौचालय व्यवस्था के कारण उन्हें गंभीर असुविधा, स्वास्थ्य संबंधी जोखिम और गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार से वंचित होना पड़ रहा है। 

याचिकाकर्ता ने दलील दी है कि यह स्थिति संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21, 47 और 48-ए का उल्लंघन है। साथ ही दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकार संरक्षण अधिनियम 2019 तथा सुप्रीम कोर्ट के राजीव कलिता बनाम भारत संघ मामले में 15 जनवरी 2025 को दिए गए निर्णय का भी पालन नहीं किया जा रहा है। 

याचिका में हाई कोर्ट से मांग की गई है कि हरिद्वार के कोर्ट परिसरों और सरकारी कार्यालयों के साथ-साथ पूरे उत्तराखंड में सार्वजनिक शौचालयों का सर्वे कराया जाए, बंद और अनुपयोगी शौचालयों को तत्काल चालू कराया जाए, महिलाओं, पुरुषों, दिव्यांगों और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए अलग एवं सुलभ शौचालय सुनिश्चित किए जाएं, नियमित सफाई एवं रखरखाव की व्यवस्था हो तथा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का समयबद्ध पालन कराया जाए। 

याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि मामले के अंतिम निस्तारण तक 3 जुलाई 2026 को दिए गए प्रतिनिधित्व पर संबंधित अधिकारियों को निर्णय लेने का निर्देश दिया जाए।