उत्तराखंड:PM मोदी के दौरे से पहले सियासत गरम, विपक्ष ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया,4 साल का जश्न या नाकामियों पर पर्दा?जश्न के शोर में दबे असली मुद्दे
देहरादून, 13 अप्रैल 2026।
उत्तराखंड सरकार के चार वर्ष पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रमों और लगातार हो रहे उच्चस्तरीय दौरों के बीच सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जश्न के माहौल में प्रदेश की जनता के बुनियादी मुद्दों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड आगमन स्वागत योग्य है, लेकिन इससे प्रदेश के जमीनी सवाल खत्म नहीं हो जाते। यशपाल आर्य ने सवाल उठाया कि आखिर यह जश्न किस उपलब्धि का है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता यह जानना चाहती है कि क्या यह बेरोजगारी, महंगाई, बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं, पलायन और बिगड़ती कानून व्यवस्था का जश्न है।
नेता प्रतिपक्ष ने सरकार से चार वर्षों का स्पष्ट लेखा-जोखा देने की मांग करते हुए कहा कि महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल और खाद्य पदार्थों की कीमतों में लगातार वृद्धि हुई है, लेकिन राहत के लिए ठोस कदम नजर नहीं आते। उन्होंने युवाओं के रोजगार पर भी सवाल उठाए। आर्य के अनुसार, प्रदेश का युवा बेरोजगारी, भर्ती घोटालों और पेपर लीक जैसी घटनाओं से परेशान है। उन्होंने पूछा कि सरकार बताए कि अब तक कितनी स्थायी नौकरियां दी गईं और कितने युवाओं का भविष्य इन विवादों में प्रभावित हुआ।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी उन्होंने गंभीर चिंता जताई। उनका कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों के अस्पताल डॉक्टरों, दवाओं और जरूरी उपकरणों की कमी से जूझ रहे हैं। वहीं शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि स्कूलों में शिक्षकों और संसाधनों की भारी कमी है, जिससे गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
पलायन के मुद्दे पर आर्य ने कहा कि गांव लगातार खाली हो रहे हैं और पहाड़ वीरान होते जा रहे हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि इस समस्या को रोकने के लिए क्या ठोस नीति और रोडमैप तैयार किया गया है। कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी उन्होंने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। आर्य ने कहा कि अपराध के मामलों में बढ़ोतरी चिंता का विषय है और सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि प्रदेश कितना सुरक्षित है।
भ्रष्टाचार के मामलों पर उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जा रही है। उन्होंने सरकार से बड़े मामलों में ठोस कार्रवाई का ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग की।
इसके साथ ही उन्होंने आपदा प्रबंधन और पुनर्वास को लेकर भी सरकार को घेरा। उनका कहना है कि आपदा प्रभावित लोग अब भी स्थायी पुनर्वास का इंतजार कर रहे हैं, जबकि हर वर्ष आपदा आने के बावजूद दीर्घकालिक रोकथाम के लिए ठोस व्यवस्था नहीं दिखती।

अंत में यशपाल आर्य ने कहा कि जनता अब केवल विज्ञापनों और इवेंट आधारित राजनीति से संतुष्ट नहीं है। सरकार को यह समझना होगा कि लोगों को जश्न नहीं, जवाब चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार के पास वास्तविक उपलब्धियां हैं तो उन्हें तथ्यों और आंकड़ों के साथ सामने लाया जाए, अन्यथा यह जश्न जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ माना जाएगा।