उत्तराखंड नीट यूजी एडमिशन में फर्जीवाड़े का भंडाफोड़: फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर एमबीबीएस सीट दिलाने वाले 2 और शातिर अरेस्ट, अब तक 5 पहुंचे सलाखों के पीछे
उत्तराखंड के मेडिकल कॉलेजों में 'नीट यूजी 2025' की काउंसलिंग के दौरान फर्जी दस्तावेजों के सहारे एमबीबीएस की सीटें हथियाने के बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। देहरादून पुलिस की विशेष जांच टीम ने कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए दो और मुख्य आरोपियों संजय कुमार और गिरीश सिंह को धर दबोचा है। इस हाई-प्रोफाइल फर्जीवाड़े में अब तक कुल 5 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। एसआईटी की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से फर्जी दस्तावेजों के जरिए दाखिला पाने और दिलाने वाले रैकेट में हड़कंप मच गया है।
प्रदेश में 'नीट यूजी-2025 के जरिए एमबीबीएस में दाखिले के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र तैयार कराने के मामले में देहरादून पुलिस की एसआईटी ने दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान संजय कुमार और गिरीश सिंह के रूप में हुई है। इस कार्रवाई के साथ ही मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है। पुलिस का कहना है कि प्रकरण से जुड़े दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच जारी है और सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी। मामले की शुरुआत 13 सितंबर 2026 को हुई, जब थाना रायपुर और थाना क्लेमेंटाउन में कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन किए जाने के संबंध में अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए। जांच के दौरान अभ्यर्थियों की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों के फर्जी होने की बात सामने आई। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने एसपी ग्रामीण-1 जया बलोनी के नेतृत्व में एसआईटी गठित की। एसआईटी ने जांच आगे बढ़ाते हुए संबंधित दस्तावेजों को कब्जे में लिया और अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में दर्ज पतों का सत्यापन कराया। पुलिस के अनुसार, सत्यापन के दौरान कई पते गलत पाए गए। संबंधित शिक्षण संस्थानों से प्राप्त रिकॉर्ड के आधार पर अभ्यर्थियों के वास्तविक पतों की जानकारी जुटाई गई और दस्तावेजों की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया गया। विवेचना के दौरान सामने आए तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संजय कुमार और गिरीश सिंह को पूछताछ के लिए थाना रायपुर लाया गया। पुलिस के मुताबिक पूछताछ तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर दोनों को गिरफ्तार किया गया। एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल के अनुसार, संजय कुमार और गिरीश सिंह एक-दूसरे के पुराने परिचित हैं। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने स्वाति, परी और खुशी नाम की तीन अभ्यर्थियों के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कराने में सहयोग किया। इनमें आधार कार्ड, डोमिसाइल और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र शामिल बताए गए हैं। पुलिस के अनुसार, इन दस्तावेजों के आधार पर अभ्यर्थियों को मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस में प्रवेश दिलाने के एवज में अनुचित धनराशि प्राप्त करने का भी आरोप है। इससे पहले एसआईटी रूपेश पंडित, अरविंद कुमार और धीरज कुमार श्रीवास्तव को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच में यह भी सामने आया है कि फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में दाखिले का लाभ लेने का आरोप है। इससे पहले पुलिस ने मामले में दस्तावेजों की पड़ताल के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार के रिकॉर्ड और राजस्व अभिलेखों की भी जांच की थी। पांच गिरफ्तारियों के बाद जांच का दायरा अब उन सभी लोगों तक पहुंचने पर केंद्रित है, जिनकी कथित भूमिका फर्जी दस्तावेज तैयार कराने, प्रमाणपत्र बनवाने या एमबीबीएस दाखिले की प्रक्रिया में रही हो सकती है। पुलिस पहले गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और बरामद दस्तावेजों के आधार पर कड़ियों की जांच कर रही है। देहरादून पुलिस के मुताबिक विवेचना साक्ष्य के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। जांच में जिन लोगों की भूमिका सामने आएगी, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। मामले ने नीट यूजी प्रवेश प्रक्रिया में दस्तावेजों के सत्यापन और आरक्षित श्रेणी के प्रमाणपत्रों की जांच को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, इन पहलुओं पर अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।