उत्तराखण्डः नगरासू गुरुद्वारा विवाद ने बढ़ाई प्रशासन की चिंता! 24 घंटे से अधिक समय से छत पर डटे निहंग, वार्ता के बावजूद नहीं निकला समाधान! तोड़फोड़ और पानी की सप्लाई रोकने के आरोप
रुद्रप्रयाग। नगरासू स्थित गुरुद्वारे को लेकर शुरू हुआ विवाद अब लगातार गहराता जा रहा है। घटना को 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद गतिरोध समाप्त नहीं हो सका है। गुरुद्वारे की छत पर कुछ निहंग सिखों के डटे रहने से क्षेत्र में तनाव और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। प्रशासन लगातार बातचीत और समझाइश के जरिए मामले का शांतिपूर्ण समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। इस बीच गुरुद्वारा संचालक बेहंत सिंह ने पत्रकार वार्ता कर पूरे मामले पर अपना पक्ष रखा और छत पर मौजूद लोगों पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारे की छत पर मौजूद लोग किसी मान्यता प्राप्त निहंग संगठन या पंजीकृत समिति से जुड़े हुए नहीं हैं। गुरुद्वारा संचालक बेहंत सिंह ने कहा कि वास्तविक निहंग सिख अनुशासित और पंजीकृत संगठनों से जुड़े होते हैं, जबकि वर्तमान में गुरुद्वारे की छत पर मौजूद लोगों की गतिविधियां न केवल धार्मिक मर्यादाओं के खिलाफ हैं बल्कि इससे श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों के बीच भय और असमंजस का वातावरण भी पैदा हो रहा है। उन्होंने बताया कि पहले चार लोग दो मोटरसाइकिलों पर गुरुद्वारे पहुंचे और बाद में तीन अन्य लोग पैदल आए। आते ही उन्होंने सेवादारों के साथ विवाद शुरू कर दिया और विरोध करने पर अभद्र भाषा का प्रयोग किया। बेहंत सिंह के अनुसार समूह के साथ एक ऐसा युवक भी था जो निहंग वेशभूषा में नहीं था और वही सबसे अधिक उत्तेजित व्यवहार कर रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि उक्त युवक ने परिसर की रेकी करने और कब्जा करने जैसी बातें भी कही थीं। उन्होंने बताया कि जब गुरुद्वारा प्रबंधन ने माहौल खराब होने से बचाने के लिए उन्हें परिसर छोड़ने को कहा तो वे बाहर निकल गए। बाहर पुलिस की तैनाती देखकर उन्हें लगा कि उन्हें गिरफ्तार कराने के लिए पुलिस बुलाई गई है। इसके बाद वे भागकर गुरुद्वारे की छत पर चढ़ गए और तभी से वहीं डटे हुए हैं।
तोड़फोड़ और पानी की सप्लाई रोकने का आरोप
गुरुद्वारा प्रबंधन ने आरोप लगाया है कि छत पर मौजूद लोगों ने सोलर सिस्टम को नुकसान पहुंचाया है और पानी की सप्लाई भी रोक दी है। इससे गुरुद्वारे में रहने वाले श्रद्धालुओं और सेवादारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रबंधन का कहना है कि फोन पर संपर्क करने का प्रयास करने पर भी वे अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं और किसी भी तरह की बातचीत के लिए तैयार नहीं हैं। मामले को और गंभीर बनाते हुए गुरुद्वारा प्रबंधन ने दावा किया है कि छत पर मौजूद लोगों ने दो व्यक्तियों को अपने कब्जे में लिया था। इनमें से एक युवक को किसी तरह छुड़ा लिया गया, लेकिन करीब 60 वर्षीय एक बुजुर्ग श्रद्धालु अभी भी उनके साथ मौजूद हैं। इस दावे के बाद स्थानीय लोगों और परिजनों की चिंता बढ़ गई है। हालांकि प्रशासन पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है।
एसपी ने भी की बातचीत, नहीं निकला समाधान
जानकारी के अनुसार रुद्रप्रयाग की पुलिस अधीक्षक नीहारिका तोमर ने भी फोन के माध्यम से छत पर मौजूद लोगों से बातचीत की और उन्हें नीचे उतरने के लिए समझाने का प्रयास किया। प्रशासन की ओर से यह आश्वासन भी दिया गया कि बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाएगा और उनके साथ किसी प्रकार की अनुचित कार्रवाई नहीं होगी। इसके बावजूद छत पर मौजूद लोग अपनी मांगों पर अड़े हुए बताए जा रहे हैं।
कर्णप्रयाग विवाद से जुड़ी बताई जा रही मांग
सूत्रों के अनुसार छत पर डटे लोगों की प्रमुख मांगों में 16 जून को कर्णप्रयाग में हुए विवाद के बाद गिरफ्तार किए गए तीन निहंग सिखों की रिहाई भी शामिल है। हालांकि प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। नगरासू और आसपास के क्षेत्रों में इस घटना को लेकर चिंता का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से जारी गतिरोध के कारण भय और असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। लोगों ने प्रशासन से जल्द शांतिपूर्ण समाधान निकालने की मांग की है।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
गुरुद्वारे जैसे संवेदनशील धार्मिक स्थल से जुड़ा मामला होने के कारण प्रशासन बेहद सावधानी के साथ कदम उठा रहा है। पुलिस और प्रशासन की कोशिश है कि बिना किसी टकराव के बातचीत के माध्यम से स्थिति को सामान्य किया जाए। हालांकि 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद गतिरोध बरकरार रहने से मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। अब सभी की नजर प्रशासन की अगली रणनीति और संभावित समाधान पर टिकी हुई है।