उत्तराखण्डः इंटर कॉलेज में ‘बुरी आत्मा’ का साया या अफवाह? छात्राओं के बेहोश होने की घटनाओं के बीच बना मंदिर, शांति पाठ और पैसों की वसूली पर जांच शुरू

Uttarakhand: Is it an 'evil spirit' haunting an inter-college or a rumor? A temple has been built amid incidents of female students fainting, a peace prayer, and a money-collection inquiry launched.

बागेश्वर। कौसानी का एक सरकारी स्कूल इन दिनों अजीबोगरीब कारणों से सुर्खियों में है। जहां शिक्षा का माहौल होना चाहिए, वहां ‘बुरी आत्मा’ और ‘शांति पाठ’ जैसी चर्चाएं लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई हैं। यह पूरा मामला राजकीय इंटर कॉलेज कौसानी से जुड़ा है, जहां पिछले कुछ समय से छात्राओं के अचानक बेहोश होने की घटनाएं सामने आती रही हैं। इन घटनाओं ने धीरे-धीरे अफवाहों को जन्म दिया और स्कूल परिसर में बुरी आत्मा के साए की बातें फैलने लगीं। बताया जा रहा है कि इन घटनाओं के बाद डर का माहौल इतना बढ़ गया कि स्कूल के पास ही एक छोटा मंदिर बना दिया गया। दावा किया गया कि यह मंदिर उस कथित आत्मा की शांति के लिए बनाया गया है, जिससे छात्राओं में डर का माहौल बना हुआ है। इतना ही नहीं, शांति पाठ के नाम पर अभिभावकों से ₹100 लिए जाने की बात भी सामने आई, जिससे मामला और ज्यादा तूल पकड़ गया और बात शिक्षा विभाग तक पहुंच गई।

मामले में मुख्य शिक्षा अधिकारी विनय कुमार आर्य ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने खंड शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि एक सप्ताह के भीतर पूरी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए, ताकि सच्चाई सामने लाई जा सके। इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें स्कूल के आसपास पशु बलि दिए जाने के दावे किए गए। वीडियो में कहा गया कि इस तरह की गतिविधियों से बच्चों में डर फैल रहा था, जिसे खत्म करने के लिए मंदिर का निर्माण किया गया। हालांकि अभिभावक शिक्षक संगठन ने इन आरोपों को लेकर सफाई दी है। उनका कहना है कि मंदिर निर्माण के लिए किसी से जबरन पैसा नहीं लिया गया और यह कदम सिर्फ बच्चों में फैले डर को दूर करने के लिए उठाया गया। बड़ी बात यह है कि स्कूल में छात्राओं के बेहोश होने की घटनाएं पहले भी कई बार हो चुकी हैं। इस पर काउंसलिंग जैसे प्रयास भी किए गए, लेकिन उनका कोई खास असर नहीं पड़ा। अब मंदिर निर्माण, शांति पाठ और पैसों के लेनदेन को लेकर उठे सवालों के बीच शिक्षा विभाग की जांच पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह मामला अंधविश्वास का है, मनोवैज्ञानिक समस्या का या फिर कुछ और, लेकिन इतना जरूर है कि इस घटना ने शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक सोच दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।