उत्तराखंडः स्वास्थ्य महानिदेशालय की मुख्य प्रशासनिक अधिकारी रजनी रावत के स्थानांतरण और कार्यमुक्ति आदेश पर लगी अंतरिम रोक! हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से चार सप्ताह में मांगा जवाब
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य महानिदेशालय में तैनात मुख्य प्रशासनिक अधिकारी रजनी रावत के प्रशासनिक आधार पर किए गए स्थानांतरण के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई की। मामले कि सुनवाई के बाद कोर्ट ने उनके 03 जुलाई के स्थानांतरण आदेश तथा 7 और 20 जुलाई 2026 के कार्यमुक्त (रिलीविंग) आदेशों के क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक अंतरिम रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि वह वर्तमान में स्वास्थ्य महानिदेशालय, देहरादून में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। 30 जून 2025 को तत्कालीन महानिदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. सुनीता टम्टा ने उनके विरुद्ध प्रतिकूल टिप्पणियों वाली रिपोर्ट शासन को भेजी थी, जो लगभग सात माह बाद 4 फरवरी 2026 को शासन के समक्ष प्रस्तुत हुई। इसी के आधार पर 13 फरवरी 2026 को उनका जिला अस्पताल चमोली स्थानांतरण कर दिया गया। याचिकाकर्ता का कहना है कि उन्होंने इस कार्रवाई के विरुद्ध लगातार सचिव एवं महानिदेशक स्वास्थ्य को प्रत्यावेदन दिए और सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरण से संबंधित अभिलेख भी मांगे। विभाग ने आरटीआई के जवाब में संबंधित सूचना उपलब्ध न होने की बात कही, जिससे उनके अनुसार उत्तराखंड स्थानांतरण अधिनियम, 2017 की धारा 18(4) का पालन नहीं किया गया। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि उन्होंने इससे पहले भी उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। 25 फरवरी 2026 को हाईकोर्ट ने चमोली स्थानांतरण आदेश को निरस्त करते हुए विभाग को उनका पक्ष सुनकर निर्णय लेने का निर्देश दिये थे। इसके अनुपालन में 24 मार्च 2026 को विभाग ने वह स्थानांतरण आदेश वापस ले लिया। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने 3 जुलाई 2026 को रजनी रावत का पुनः प्रशासनिक आधार पर देहरादून से जिला अस्पताल हरिद्वार स्थानांतरण कर दिया तथा 7 जुलाई और 20 जुलाई को उन्हें कार्यमुक्त करने के आदेश भी जारी कर दिए।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि विभाग ने उनके अभ्यावेदनों पर निष्पक्ष विचार करने के बजाय पूर्व में लगाए गए आरोपों को दोहराते हुए नया स्थानांतरण आदेश जारी किया, जो हाईकोर्ट के पूर्व निर्णय की भावना के विपरीत है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि याचिकाकर्ता को समिति की बैठक की मौखिक सूचना दी गई थी, लेकिन उन्होंने सुनवाई में सहयोग नहीं किया। हालांकि खंडपीठ ने प्रथम दृष्टया पाया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई दस्तावेज नहीं है जिससे यह स्पष्ट हो कि याचिकाकर्ता को समिति के समक्ष उपस्थित होने की तिथि की विधिवत सूचना दी गई थी। न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व में भी इसी आधार पर 13 फरवरी 2026 का स्थानांतरण आदेश निरस्त किया गया था। याचिका में यह भी कहा गया है कि रजनी रावत ने 6 और 7 जुलाई 2026 को दोबारा विस्तृत प्रत्यावेदन दिए। उनकी सास ने भी स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल को प्रार्थना पत्र भेजकर स्थानांतरण निरस्त करने का अनुरोध किया, जिस पर मंत्री कार्यालय ने उचित सुनवाई कर निर्णय लेने के निर्देश दिए, लेकिन विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके अतिरिक्त, सहकर्मियों की शिकायतों से संबंधित दस्तावेजों के लिए दायर आरटीआई और प्रथम अपील के जवाब में भी विभाग ने ‘सूचना उपलब्ध नहीं है’ बताया, जिसे याचिकाकर्ता ने अपने विरुद्ध लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है। प्रथम दृष्टया मामले को विचारणीय मानते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से चार सप्ताह में जवाब तलब किया है। साथ ही 3 जुलाई 2026 के स्थानांतरण आदेश तथा 7 और 20 जुलाई 2026 के रिलीविंग आदेशों के प्रभावी क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक अंतरिम रोक लगा दी है।