उत्तराखण्डः गंगा में अवैध खनन का मामला! हाईकोर्ट ने सीज वाहनों को छोड़ने की दी अनुमति! जब्त माल बेचने पर रोक

Uttarakhand: Illegal mining in the Ganges River! The High Court has granted permission to release seized vehicles! The sale of confiscated goods is prohibited.

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हरिद्वार में गंगा नदी के किनारे हो रहे अवैध खनन के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई के बाद न्यायाधीश रविन्द्र मैठाणी और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खण्डपीठ ने स्टोन क्रशर मालिकों से कहा है कि वे अपने सीज वाहनों को छुड़ा सकते हैं। लेकिन जब्त माल को कोर्ट के आदेश के बैगर बेच नही  सकते। सुनवाई पर मातृ सदन की तरफ से कहा गया कि 30 जुलाई 2025 को कोर्ट ने अवैद्ध संचालित स्टोन क्रेशरों के संचालन पर रोक लगाई थी। उसके बाद भी इनके द्वारा अवैद्ध रूप से खनन कार्य किया जा रहा है। इसका विरोध करते हुए स्टोन क्रशर मालिकों की तरफ से कहा गया कि कोर्ट के आदेश के बाद उनके स्टोन क्रशर में लगे वाहन सीज हो चुके हैं। लिहाजा उनको रिलीज कराए जाने की अनुमति दी जाय। फिलहाल कोर्ट ने दो स्टोन क्रेशरों की मशीनों को रिलीज करने के आदेश दे दिए हैं। लेकिन सुनवाई के दौरान मातृ सदन की तरफ से कहा गया कि जो भी वाहन खनन के दौरान कोर्ट के आदेश पर सीज किये गए थे। उनकी नीलामी की जाए। उनसे मिलने वाली रकम को पर्यावरण की देख रेख में खर्चा किया जाय। बता दें कि वर्ष 2022 में हरिद्वार मातृ सदन ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि हरिद्वार में रायवाला से भोगपुर के बीच गंगा नदी में नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से अवैध खनन किया जा रहा है जिससे गंगा नदी के अस्तित्व को खतरा पैदा हो गया है। गंगा नदी में खनन करने वाले नेशनल मिशन क्लीन गंगा को पलीता लगा रहे हैं। जनहित याचिका में कोर्ट से प्रार्थना की है कि गंगा नदी में हो रहे अवैध खनन पर रोक लगाई जाए, ताकि गंगा नदी के अस्तित्व को बचाया जा सके। अब खनन कुम्भ क्षेत्र में भी किया जा रहा है। याचिकाकर्ता का यह भी कहना थ कि केंद्र सरकार ने गंगा नदी को बचाने के लिए एनएमसीजी बोर्ड गठित किया है। जिसका मुख्य उद्देश्य गंगा को साफ करना व उसके अस्तित्व को बचाए रखना है। एनएमसीजी द्वारा राज्य सरकार को बार-बार आदेश दिए गए कि यहां खनन कार्य नहीं किया जाय। उसके बाद में सरकार द्वारा यहां खनन कार्य करवाया जा रहा है। यूएन ने भी भारत सरकार को निर्देश दिए थे कि गंगा को बचाने के लिए क्या-क्या कदम उठाए जा रहे। उसके बाद भी सरकार द्वारा गंगा के अस्तित्व को समाप्त किया जा रहा है।