उत्तराखंड: जल विद्युत परियोजनाओं पर बिजली उत्पादन टैक्स लगाने का मामला! हाईकोर्ट में हुई सुनवाई

Uttarakhand: High Court hears case against levying power generation tax on hydropower projects

नैनीताल। उत्तराखण्ड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा जल विद्युत परियोजनाओं पर विद्युत उत्पादन पर  टैक्स लगाए जाने के खिलाफ विभिन्न जल विद्युत परियोजनाओं की ओर से दायर विशेष अपीलों में सुनवाई की। मामले में न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की एकलपीठ ने जल विद्युत परियोजनाओं के हक में फैसला देते हुए कहा कि राज्य सरकार जनरेशन आफ इलेक्ट्रिसिटी पर टैक्स नही लगा सकती। यह टैक्स लगाना राज्य सरकार का विषय नही है, केंद्र सरकार का है। पूर्व में कोर्ट की एकलपीठ ने एक्ट को सही ठहराते हुए विभिन्न हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट कम्पनियों द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया था। इस आदेश को हाइड्रोपावर कम्पनियों ने विशेष अपील दायर कर खण्डपीठ में चुनौती दी है। विशेष अपीलों में सुनवाई करते हुए पूर्व मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी ने इसपर अलग-अलग मत दिए। इसकी पुष्टि के लिए पूर्व में न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की एकलपीठ को रिफरेंस आदेश भेजा गया था। जिसपर आज उनकी अदालत ने यह निर्णय दिया। मामले के अनुसार राज्य बनने के बाद उत्तराखण्ड सरकार ने राज्य की नदियों में जल विद्युत परियोजनाएं लगाए जाने हेतु विभिन्न कम्पनियों को आमंत्रित किया था और उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश राज्य व जल विद्युत कम्पनियों के मध्य करार हुआ। जिसमें तय हुआ कि कुल उत्पादन के 12 फीसदी बिजली उत्तराखण्ड को निशुल्क दी जाएगी। जबकि शेष बिजली उत्तर प्रदेश को बेची जाएगी। लेकिन 2012 में उत्तराखंड सरकार ने उत्तराखण्ड वाटर टैक्स ऑन इलैक्ट्रिसिटी जनरेशन एक्ट बनाकर जल विद्युत कम्पनियों पर वायर की क्षमतानुसार 2 से 10 पैंसा प्रति यूनिट वाटर टैक्स लगा दिया। जिसे अलकनन्दा पावर प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड, टी एच डी सी, एन एच पी सी, स्वाति पावर प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड, भिलंगना हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट, जय प्रकाश पावर वेंचर प्राइवेट लिमिटेड आदि ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट की एकलपीठ ने इनकी याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा था कि विधायिका को इस तरह का एक्ट बनाने का अधिकार है। यह टैक्स पानी के उपयोग पर नहीं बल्कि पानी से विद्युत उत्पादन पर है जो संवैधानिक दायरे के भीतर बनाया गया है।