उत्तराखण्ड ब्रेकिंगः उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण पर हाईकोर्ट सख्त!सरकार के बार-बार समय मांगने पर जताई नाराजगी, 7 अक्टूबर को होगी अंतिम सुनवाई
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रदेश के सरकारी विभागों में वर्षों से लगे उपनल संविदा कर्मचारियों को आदेश होने के बाद भी सरकार द्वारा नियमित नही क़रने और उन्हें चयनित वेतनमान नही दिये जाने तथा उनको दिए गए वेतन से जीएसटी आदि काटे जाने के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई की। आज हुई सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि कोर्ट अगली तिथि को इस मामले पर अंतिम सुनवाई करेगी। जिसके लिए कोर्ट ने सात अक्टूबर की तिथि नियत की है। आज मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ में हुई। सुनवाई पर राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि इनके नियमितीकरण के लिए सरकार को नियमावली में संसोधन करना पड़ेगा इसलिए उन्हें समय दिया जाए। जिसपर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि पूर्व के आदेशों पर आज तक सरकार ने कोई निर्णय नही लिया। जो अपने आप में अवमानना है। हर समय कोर्ट से सरकार समय दिए जाने की मांग करती आई है। वहीं संघ की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि उन्हें समान कार्य समान वेतन दिये जाने के लिए उनसे बांड भरने का दवाब डाला जा रहा है, जो गलत है। बता दें कि उपनल कर्मचारी संघ द्वारा उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर कर कहा गया है कि 2018 में हाईकोर्ट ने उपनल संविदा कर्मचारियों को सरकारी नौकरी में नियमितीकरण का आदेश दिया था। जिसके बाद सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार को 2024 में झटका और संविदा कर्मचारियों के हक में फैसला दिया था। जब हाईकोर्ट में इस पूरे मामले में अवमानना याचिका दाखिल हुई तो सरकार पिछले 1 साल से इसको लटकाती रही है। न सरकार कोर्ट के आदेश का अनुपालन कर रही है न ही उन्हें नियमित करने के लिए कोई कदम उठा रही है। आदेश का अनुपालन न होने की वजह से 22 हजार उपनल कर्मचारी अधर में लटके पड़े हैं।