संसद मार्च पर बवाल: प्रदर्शन में उपद्रव करने वालों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की सख्त कार्रवाई,अब तक 10 एफआईआर

Uproar over Parliament march: Delhi Police takes strict action against those creating a disturbance during the protest; 10 FIRs registered so far.

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संसद मार्च के दौरान हुए हिंसक घटनाक्रम के बाद दिल्ली में राजनीतिक और छात्र आंदोलन का माहौल और गर्मा गया है। एक ओर दिल्ली पुलिस ने उपद्रव, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और कानून-व्यवस्था भंग करने के आरोप में अब तक विभिन्न थानों में 10 एफआईआर दर्ज की हैं, वहीं दूसरी ओर प्रदर्शनकारी छात्र अगले ही दिन दोबारा जंतर-मंतर पहुंचकर आंदोलन को नए सिरे से शुरू कर चुके हैं। लाठीचार्ज, आंसू गैस और झड़पों के बावजूद छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं। दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के अनुसार संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा और उपद्रव के संबंध में पार्लियामेंट स्ट्रीट थाना क्षेत्र में चार, कनॉट प्लेस में तीन तथा मंदिर मार्ग, बाराखंभा रोड और कर्तव्य पथ थानों में एक-एक एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कई स्थानों पर बैरिकेड तोड़े गए, सुरक्षाबलों पर पथराव किया गया और सार्वजनिक व्यवस्था बाधित हुई, जिसके आधार पर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

उधर, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच मंगलवार तड़के मानवता की एक मिसाल भी देखने को मिली। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में फूड डिलीवरी पार्टनर प्रदर्शन स्थल पर छात्रों के लिए भोजन पहुंचाता दिखाई दिया। डिलीवरी कर्मी ने बताया कि मुंबई निवासी अनुज रावत ने ऑनलाइन भोजन का भुगतान पहले ही कर दिया था और निर्देश दिया था कि जंतर-मंतर पर मौजूद किसी भी जरूरतमंद या भूखे प्रदर्शनकारी को भोजन वितरित कर दिया जाए। इस पहल को सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने इंसानियत और एकजुटता का उदाहरण बताया। इसी बीच आंदोलन के दौरान पार्टी के प्रवक्ता विजेता दहिया का एक वीडियो वायरल हो गया, जिसमें वह कथित तौर पर प्रदर्शन स्थल से बाहर जाकर बर्गर खाते दिखाई दिए। वीडियो सामने आने के बाद सीजेपी ने तत्काल कार्रवाई करते हुए विजेता दहिया को प्रवक्ता पद समेत सभी आधिकारिक जिम्मेदारियों से हटा दिया। पार्टी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि जब कार्यकर्ता पुलिस कार्रवाई का सामना कर रहे थे, उस समय उनका यह व्यवहार पार्टी के मूल्यों और सिद्धांतों के विपरीत तथा पूरी तरह अस्वीकार्य है। संसद मार्च के दौरान हुई झड़पों में बड़ी संख्या में छात्र और पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल के सूत्रों के अनुसार लगभग 110 छात्रों और 40 पुलिसकर्मियों का उपचार किया गया। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने इसे आधिकारिक आंकड़ा नहीं बताया है। चिकित्सकों के मुताबिक अधिकांश घायलों के सिर, हाथ, पैर, कमर और आंखों के आसपास गंभीर चोटें थीं। कई लोगों को फ्रैक्चर हुआ, जबकि कुछ के सिर पर टांके लगाने पड़े। अस्पताल के सर्जरी, ऑर्थोपेडिक, न्यूरोसर्जरी और मेडिसिन विभागों की टीम लगातार घायलों का इलाज कर रही है। अन्य अस्पतालों में भी घायल छात्रों और पुलिसकर्मियों का उपचार जारी है। उधर, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्र संघ ने मंगलवार रात बराक हॉस्टल से गंगा ढाबा तक आक्रोश मार्च निकाला। छात्र संघ ने संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले छोड़े जाने और कथित पैलेट गन के इस्तेमाल का विरोध करते हुए दिल्ली पुलिस कमिश्नर और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। मार्च के दौरान छात्रों ने केंद्र सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। जेएनयू छात्र संघ का दावा है कि पुलिस कार्रवाई में एक हजार से अधिक छात्र विभिन्न अस्पतालों में उपचार के लिए भर्ती हुए हैं, हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। दिल्ली में सीजेपी का आंदोलन अब केवल छात्र विरोध तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक बहस का भी बड़ा मुद्दा बन चुका है। पुलिस की कानूनी कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के आंदोलन जारी रखने के ऐलान के बीच राजधानी में हालात पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह आंदोलन और पुलिस की कार्रवाई किस दिशा में जाती है, इस पर राजनीतिक और सामाजिक हलकों की निगाहें बनी रहेंगी।