मोदी कैबिनेट से केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा! राष्ट्रपति ने दी मंजूरी,कार्यकाल समाप्त होने के बाद छोड़ा पद
नई दिल्ली। मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के मंत्रिमंडल से एक बड़ी राजनीतिक हलचल सामने आई है। भारतीय जनता पार्टी के बेहद वरिष्ठ और अनुभवी नेता जॉर्ज कुरियन ने मंगलवार को केंद्रीय राज्य मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। कुरियन मोदी सरकार में अल्पसंख्यक कार्य, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण विभागों में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। हाल ही में संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा सदस्य के रूप में उनका छह साल का कार्यकाल समाप्त हो गया है, जिसके चलते उन्हें नियमतः यह कदम उठाना पड़ा। राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है।
राजनीतिक गलियारों में इस इस्तीफे को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। जॉर्ज कुरियन को राज्यसभा का कार्यकाल पूरा होने के बाद भाजपा द्वारा दोबारा सदन (संसद) भेजने के लिए उम्मीदवार नहीं बनाया गया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केरल विधानसभा चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, जिसका खामियाजा और सांगठनिक बदलाव का असर इस फैसले के रूप में देखना पड़ा है। पार्टी अब केरल और मध्य प्रदेश के सांगठनिक समीकरणों को नए सिरे से साधने की कोशिश में है। 65 वर्षीय जॉर्ज कुरियन का राजनीतिक सफर बेहद अनुशासित और लंबा रहा है। वह भाजपा के उन गिने-चुने और जमीनी नेताओं में शामिल हैं, जो साल 1980 में पार्टी की स्थापना के समय से ही इसके साथ मजबूती से खड़े रहे हैं। मूल रूप से दक्षिण भारत के केरल राज्य (कोट्टायम जिला) से ताल्लुक रखने वाले कुरियन को भाजपा ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य बनाकर संसद भेजा था। अगस्त 2024 में उन्हें केंद्र में मंत्री पद की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के साथ-साथ वह भारत के सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) में वकील के तौर पर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं, जिससे उनकी छवि एक बेहद पढ़े-लिखे और सुलझे हुए राजनेता की रही है। जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि उनके विभागों की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाएगी। अल्पसंख्यक कार्य और डेयरी जैसे मंत्रालयों में राज्य मंत्री के तौर पर उनका कार्यकाल काफी सक्रिय रहा। सूत्रों के मुताबिक, आगामी संसद सत्र से पहले प्रधानमंत्री इन विभागों का अतिरिक्त प्रभार कैबिनेट के ही किसी अन्य साथी को सौंप सकते हैं या जल्द ही एक छोटे फेरबदल के जरिए नए चेहरे को मौका मिल सकता है। फिलहाल, भाजपा संगठन में कुरियन को किसी नई और बड़ी संगठनात्मक भूमिका में तैनात किए जाने की अटकलें भी तेज हैं।