कोलकाता में निर्माणाधीन तीन मंजिला गोदाम ढहा, कई मजदूर मलबे में दबे! पांच मौतों की आशंका, युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन

Under-construction three-storey warehouse collapses in Kolkata; several workers trapped under the debris! Five feared dead; rescue operation underway on a war footing.

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में बुधवार दोपहर एक दर्दनाक हादसे ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। शहर के तारातला इलाके में स्थित एक निर्माणाधीन तीन मंजिला गोदाम अचानक भरभराकर गिर गया, जिससे वहां काम कर रहे दर्जनों मजदूर मलबे के नीचे दब गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे में कम से कम पांच लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है, जबकि दो दर्जन से अधिक लोगों के अभी भी मलबे में फंसे होने की संभावना है। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और राहत-बचाव कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया। हादसा पश्चिम कोलकाता के ट्रांसपोर्ट डिपो रोड स्थित ब्रेस ब्रिज के पास बुधवार दोपहर करीब 12 बजे हुआ। बताया जा रहा है कि उस समय गोदाम की छत की ढलाई का कार्य चल रहा था और निर्माण स्थल पर लगभग 50 से 60 मजदूर मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अचानक इमारत का ढांचा कमजोर पड़ गया और देखते ही देखते पूरी इमारत धराशायी हो गई। भारी लोहे के बीम, कंक्रीट और निर्माण सामग्री के नीचे कई मजदूर दब गए। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने राहत कार्य शुरू किया और पुलिस को सूचना दी। कुछ ही देर में कोलकाता पुलिस, दमकल विभाग, आपदा प्रबंधन समूह (DMG), नागरिक सुरक्षा बल और अन्य एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंच गईं। हालात की गंभीरता को देखते हुए सेना की सहायता भी ली गई और संयुक्त रूप से बचाव अभियान शुरू किया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार अब तक कई लोगों को मलबे से बाहर निकाला जा चुका है। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है। राहत एजेंसियों का कहना है कि मलबे के नीचे अभी भी कई लोगों के फंसे होने की आशंका है, इसलिए बचाव अभियान लगातार जारी रखा गया है। घटनास्थल से सामने आई तस्वीरें हादसे की भयावहता को बयां कर रही हैं। चारों ओर लोहे के विशाल बीम, टूटी हुई कंक्रीट और धूल का गुबार दिखाई दे रहा है।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि इमारत गिरने के बाद काफी देर तक मलबे के नीचे दबे लोगों की चीख-पुकार सुनाई देती रही। कई मजदूर अपने साथियों को बचाने के लिए मलबा हटाने का प्रयास करते रहे, लेकिन भारी ढांचे के कारण राहत कार्य में काफी कठिनाई आई। बचाव दल द्वारा गैस कटर, वर्टिकल ड्रिलिंग मशीन, क्रेन और अन्य भारी उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है। मलबे के बीच सावधानीपूर्वक कटिंग कर फंसे हुए लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक यह पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हो जाता कि मलबे के नीचे कोई व्यक्ति फंसा नहीं है। इस बीच हादसे को लेकर कई गंभीर सवाल भी उठने लगे हैं। दमकल विभाग के एक अधिकारी ने दावा किया है कि निर्माण कार्य में घटिया गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग किया जा रहा था। वहीं स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि क्षेत्र में लंबे समय से अवैध निर्माण गतिविधियां चल रही थीं और कई बार शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। राज्य सरकार के मंत्री इंद्रनील खान ने घटनास्थल का दौरा करते हुए कहा कि फिलहाल सरकार की पहली प्राथमिकता मलबे के नीचे दबे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। उन्होंने बताया कि पुलिस, दमकल विभाग, आपदा प्रबंधन टीम और सेना के जवान मिलकर राहत अभियान चला रहे हैं। मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि निर्माण कार्य को लेकर कई सवाल सामने आए हैं और पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। सूत्रों के अनुसार निर्माणाधीन गोदाम की पहली और दूसरी मंजिल का ढांचा तैयार हो चुका था, जबकि ग्राउंड फ्लोर पर काम चल रहा था। इसी दौरान छत की ढलाई के समय अचानक संरचना कमजोर पड़ गई और पूरी इमारत ढह गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्माण मानकों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया होगा, तो यह हादसा उसी का परिणाम हो सकता है। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारियों के साथ वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में लेकर आम लोगों की आवाजाही रोक दी गई है। आसपास के अस्पतालों को भी अलर्ट पर रखा गया है ताकि जरूरत पड़ने पर घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।