टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: हथियार सप्लाई नेटवर्क को लेकर बड़ा खुलासा! गर्लफ्रेंड समेत दो महिलाओं को मिला 10-12 हजार का लालच, अमृतसर से मुंबई तक बिछाया गया जाल
मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग के मामले में हथियारों की सप्लाई करने वाले नेटवर्क की अहम कड़ियां सामने आई हैं। पुलिस जांच के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क में केवल पुरुष ही नहीं, बल्कि दो महिलाओं की भूमिका भी सामने आई है। हरियाणा के सोनीपत निवासी कुणाल ने अपनी गर्लफ्रेंड राधा को हथियार मुंबई पहुंचाने के लिए तैयार किया था। इस काम में बबिता भी उसके साथ शामिल बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार, दोनों महिलाओं को हथियारों से भरा बैग मुंबई पहुंचाने के लिए 10 से 12 हजार रुपये दिए गए थे। जांच में अमृतसर से हथियार उठाने, दिल्ली से मुंबई तक पहुंचाने और फिर बैग एक अन्य व्यक्ति को सौंपने की पूरी कड़ी सामने आई है। फिलहाल पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। पुलिस के मुताबिक, हथियारों की सप्लाई के लिए बेहद सुनियोजित तरीका अपनाया गया। इसमें एन्क्रिप्टेड ऐप के जरिए बातचीत और पहले से तय ठिकानों का इस्तेमाल किया गया। जांच में ‘डेड लेटर बॉक्स’ नाम की व्यवस्था का भी पता चला है। इस तरीके में किसी सामान को पहले से निर्धारित स्थान पर रख दिया जाता है और दूसरा व्यक्ति वहां पहुंचकर उसे उठा लेता है। इस दौरान दोनों के बीच आमने-सामने मुलाकात होना जरूरी नहीं होता। पुलिस के अनुसार, अमृतसर में हथियार रखने की लोकेशन अनिल पंडित ने कुणाल को भेजी थी। कुणाल और सुमित को कथित तौर पर यह जानकारी नहीं थी कि हथियार वहां किसने रखे थे। जांच एजेंसियां इसे हथियारों की सप्लाई करने वालों और उन्हें आगे पहुंचाने वालों के बीच सीधा संपर्क सीमित रखने की रणनीति के तौर पर देख रही हैं।
जेल से बाहर आने के बाद अनिल पंडित से जुड़ा कुणाल
पुलिस सूत्रों के अनुसार, कुणाल इसी साल जुलाई में सोनीपत जेल से बाहर आया था। इसके बाद हरसाना गांव में रहने वाले एक दोस्त के माध्यम से उसकी मुलाकात अनिल पंडित से कराई गई। धीरे-धीरे दोनों के बीच संपर्क बढ़ा और एन्क्रिप्टेड ऐप के जरिए बातचीत होने लगी। जांच के मुताबिक, करीब दो सप्ताह पहले अनिल पंडित ने कुणाल को अमृतसर से हथियार लाने और उन्हें मुंबई पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। इस काम के लिए कुणाल और सुमित को कथित तौर पर 70 से 80 हजार रुपये दिए गए थे। इसी रकम में से 10 से 12 हजार रुपये राधा और बबिता को देने की बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, कुणाल और राधा की मुलाकात करीब दो महीने पहले हुई थी। दोनों के बीच जान-पहचान बढ़ने के बाद कुणाल ने कथित तौर पर राधा को अपनी गतिविधियों के बारे में बताया और उसे हथियार मुंबई ले जाने के लिए तैयार किया। राधा और बबिता सोनीपत की एक फैक्ट्री में काम करती हैं। जांच में सामने आया है कि दोनों को हथियारों से भरा बैग लेकर मुंबई पहुंचने की जिम्मेदारी दी गई थी।
दिल्ली से मुंबई पहुंचाया बैग, नाबालिग को सौंपने का आरोप
जांच के मुताबिक, 15 अक्टूबर को कुणाल दोनों महिलाओं को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन लेकर पहुंचा। बताया गया है कि पिस्टल राधा के बैग में रखी गई थी। इसके बाद राधा और बबिता ट्रेन से मुंबई के लिए रवाना हो गईं। इस दौरान कुणाल कथित तौर पर एन्क्रिप्टेड ऐप के माध्यम से उनके संपर्क में रहा और अनिल पंडित से मिलने वाले निर्देश उन तक पहुंचाता रहा। पुलिस के अनुसार, 17 अक्टूबर को दोनों महिलाएं मुंबई के दादर स्टेशन पर उतरीं और एक होटल में ठहरीं। उसी दिन सुबह करीब 11 बजे एक नाबालिग लड़का होटल के पास पहुंचा और राधा से बैग लेकर चला गया। पुलिस इस बैग में रखे हथियार को टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग की घटना से जोड़कर जांच कर रही है।
फायरिंग के बाद शूटरों को निकालने की तैयारी
पुलिस के मुताबिक, 18 अक्टूबर को शाम करीब सात बजे टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग हुई। इसके बाद अनिल पंडित ने कथित तौर पर कुणाल को बताया कि शूटर मुंबई में फंस गए हैं और उन्हें वहां से निकालने की व्यवस्था करने को कहा। इसी दिन राधा और बबिता दादर से हरिद्वार जाने वाली एक्सप्रेस ट्रेन में सवार होकर दिल्ली के लिए रवाना हो गईं। 20 अक्टूबर को दोनों महिलाओं को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से पकड़ा गया, जबकि कुणाल और सुमित को हरियाणा के सोनीपत से हिरासत में लिया गया। इसके बाद महाराष्ट्र पुलिस की सीआईडी और मुंबई की टीम ने अदालत की अनुमति लेकर चारों को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया। पुलिस को चारों आरोपियों की तीन दिन की ट्रांजिट रिमांड भी मिली है। अब जांच एजेंसियां हथियारों के स्रोत, बैग लेने वाले नाबालिग, कथित शूटरों और पूरे नेटवर्क के अन्य सदस्यों के बीच संपर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।