सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसलाः सोमवार और शुक्रवार को केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी सुनवाई! कार-पूलिंग पर भी जोर
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अपनी कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए डिजिटल और पर्यावरण-अनुकूल व्यवस्था को स्थायी रूप देने की दिशा में अहम कदम उठाया है। अदालत ने सोमवार और शुक्रवार को मामलों की सुनवाई केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से करने का निर्णय लिया है। इस फैसले को न्यायिक व्यवस्था में आधुनिक तकनीक के व्यापक उपयोग और ऊर्जा संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार अब सभी मिसलेनियस डेज, यानी सोमवार, शुक्रवार और अन्य निर्धारित दिनों में मामलों की सुनवाई केवल वर्चुअल माध्यम से होगी। इसके तहत वकील, पक्षकार और संबंधित अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत की कार्यवाही में शामिल होंगे। कोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि सुनवाई से पहले सभी संबंधित पक्षों को समय पर वीडियो लिंक उपलब्ध कराए जाएं और तकनीकी सहायता की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी पक्ष को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। यह कदम कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू हुई डिजिटल सुनवाई प्रणाली को अब स्थायी और अधिक व्यवस्थित स्वरूप देने की दिशा में उठाया गया है। महामारी के समय न्यायिक प्रक्रिया को बाधित होने से बचाने के लिए शुरू की गई ऑनलाइन सुनवाई व्यवस्था को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने इसे भविष्य की न्यायिक व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाने का निर्णय लिया है। सुप्रीम कोर्ट के सभी न्यायाधीशों ने सर्वसम्मति से यह भी तय किया है कि न्यायाधीशों और संबंधित अधिकारियों के बीच कार-पूलिंग व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाएगा।
इसका उद्देश्य ईंधन की खपत को कम करना, संसाधनों का बेहतर उपयोग करना और पर्यावरण पर पड़ने वाले दबाव को कम करना है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब दुनिया ऊर्जा संकट, जलवायु परिवर्तन और बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रही है। सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने रजिस्ट्री कर्मचारियों के लिए भी नई कार्य प्रणाली लागू की है। आदेश के अनुसार प्रत्येक शाखा और सेक्शन में 50 प्रतिशत कर्मचारी सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम कर सकेंगे। हालांकि यह भी स्पष्ट किया गया है कि बाकी कर्मचारी कार्यालय में मौजूद रहेंगे ताकि कामकाज बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से चलता रहे। वर्क फ्रॉम होम करने वाले कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने मोबाइल फोन और अन्य संचार माध्यमों पर हर समय उपलब्ध रहें। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें तुरंत कार्यालय पहुंचने के लिए तैयार रहना होगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी आपात स्थिति में न्यायिक कार्य प्रभावित न हो। गौरतलब है कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों से ईंधन की खपत कम करने की अपील की थी। इसी के तहत प्रधानमंत्री सहित कई केंद्रीय मंत्रियों ने अपने काफिलों के आकार में कटौती की है। कई राज्य सरकारों ने भी सरकारी कार्यालयों में वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं, ताकि ऊर्जा की बचत की जा सके। सुप्रीम कोर्ट का यह कदम देश की अन्य संस्थाओं के लिए भी एक उदाहरण माना जा रहा है। न्यायपालिका का यह निर्णय दिखाता है कि आधुनिक तकनीक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी को साथ लेकर चलना अब समय की मांग बन चुका है।